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ISRO अब रॉकेट और सेटेलाइट नहीं बनाएगा? जानिए इसके पीछे का वजह
ISRO अब तकनीक के विकास पर ज्यादा ध्यान देगा

ISRO अब रॉकेट और सेटेलाइट नहीं बनाएगा? जानिए इसके पीछे का वजह

Aug 23, 2026
11:11 am

क्या है खबर?

निजी अंतिरक्ष कंपनियों की भूमिका बढ़ाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) धीरे-धीरे लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट बनाने के नियमित काम से पीछे हटेगा। बिजनेस टुडे के 'इंडिया @ 100 इकोनॉमी समिट' में बोलते हुए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका ने इस बदलाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी अब रिसर्च, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, वैज्ञानिक मिशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान देगी।

शुरुआत 

SSLV से हो चुकी है शुरुआत 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गोयनका ने कहा, "ISRO कोई भी लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही उनका निर्माण करेगा। यह सारा काम प्राइवेट सेक्टर या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) करेंगे।"

इस बदलाव की दिशा में पहला कदम स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) के साथ उठाया जा चुका है, जिसकी टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन के अधिकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को दिए गए।

अगले चरण में पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) और लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM3) शामिल हो सकते हैं।

फोकस

अब यह काम करेगी अंतरिक्ष एजेंसी 

आने वाली प्रक्रिया में सरकारी कंपनियों को हिस्सा लेने की इजाजत नहीं होगी, जिससे इन 2 लॉन्च व्हीकल के प्रोडक्शन की जिम्मेदारी निजी उद्योग को संभालनी होगी।

गोयनका ने ISRO के काम करने के तरीके में एक बड़े बदलाव के बारे में भी बताया।

उन्होंने कहा कि यह एजेंसी वैज्ञानिक मिशन, खास सैटेलाइट, नई टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देगी। जब ये टेक्नोलॉजी परिपक्व हो जाएंगी तो इन्हें व्यावसायिक कामकाज के लिए निजी कंपनियों को सौंपा जा सकता है।

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