शादी छिपाकर दूसरा विवाह? बॉम्बे हाईकोर्ट ने छीना गुजारा भत्ता
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महिला को गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ किया कि महिला का दूसरा विवाह मान्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसने यह बात छुपाई थी कि वह पहले से ही शादीशुदा है। जस्टिस एमएम सथाये ने स्पष्ट रूप से कहा, "कोई भी अपनी गलती का फायदा नहीं उठा सकता।"
हालांकि, कोर्ट ने महिला के नाबालिग बेटे के लिए हर महीने 1000 रुपये देने के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने यह साफ कर दिया कि बच्चों का अधिकार है कि उन्हें आर्थिक सहारा मिले, भले ही उनके माता-पिता की स्थिति कितनी भी उलझी हुई क्यों न हो।
महिला ने 15,000 रुपये हर महीने की मांग की थी
दरअसल, साल 2010 में महिला ने अपने और अपने बेटे के लिए हर महीने 15,000 रुपये की मांग की थी। उसने अपने पति पर उत्पीड़न और छोड़ देने का आरोप लगाया था। लेकिन पति ने अदालत में तर्क दिया कि उनका विवाह कानूनी रूप से वैध नहीं था, क्योंकि महिला ने अपने पहले पति से कभी तलाक नहीं लिया था।
कोर्ट में इस मामले पर काफी बहस चली। एक मजिस्ट्रेट ने 2015 में महिला को कुछ गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में उसे रद्द कर दिया गया। आखिर में फैसला यही रहा: महिला को कोई गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा, लेकिन उसके बेटे को हर महीने 1000 रुपये दिए जाएंगे।