एयरलाइंस के आगे फिर झुकी सरकार? विमानों में 60 प्रतिशत निशुल्क सीट देने का फैसला वापस
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने पिछले महीने हवाई यात्रा करने वालों को बड़ी राहत देते हुए विमानों में अपनी पसंद की सीट चयन पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को हटा दिया था, लेकिन अब उसने यह फैसला वापस ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) को लिखे 2 अप्रैल के पत्र में कहा कि व्यापक जांच होने तक इस प्रावधान को "अगले आदेश तक स्थगित" रखा जाएगा।
आपत्ति
एयरलाइंस ने उठाई थी आपत्तियां
मंत्रालय ने कहा कि उसने यह फैसला फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) और अकासा एयर की आपत्तियों के बाद लिया है। उन्होंने किराया संरचना पर नियम के प्रभाव और अनियंत्रित किराया व्यवस्था के साथ इसकी असंगति पर सवाल उठाए थे। FIA ने 19 मार्च को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि एयरलाइंस किराए में वृद्धि करके अतिरिक्त आय की भरपाई कर लेंगी। FIA ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देकर आदेश को DGCA अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
फैसला
पहले सरकार ने सीटों को लेकर क्या कहा था?
मंत्रालय ने 17 मार्च को आदेश जारी कर सभी एयरलाइन संचालकों को कहा था कि किसी भी उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें निशुल्क चयन के लिए आवंटित की जाएं। इसके बाद पसंद की सीटों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। साथ ही, मंत्रालय ने एयरलाइंस को एक ही PNR पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बैठाने का निर्देश दिया था। फैसले से परिवार के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिली थी।
नियम
आदेश वापस लेने के बाद क्या होगा?
मौजूदा समय में भारतीय एयरलाइंस वेब चेक-इन के दौरान सीट चयन के लिए अतिरिक्त शुल्क लेती हैं। आमतौर पर उड़ानों में केवल 5 से 15 प्रतिशत सीटें ही बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होती हैं। विमान के आगे की ओर और खिड़की वाली सीटें आमतौर पर अधिक महंगी होती हैं। परिवार के साथ यात्रा करने पर एक PNR से बुकिंग होने के बाद भी सदस्यों अलग-अलग सीट पर बैठाया जाता है। फैसला वापस लेने से इनमें कोई परिवर्तन नहीं होगा।