अमित शाह का NIDIA गठबंधन की रैली पर बड़ा हमला, कहा- भारत कभी नहीं भूलेगा
क्या है खबर?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी INDIA गठबंधन की रैली पर तीखा हमला बोला है। 1 नवंबर को चंडीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने इस रैली को सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने वाला एक 'जलसा' करार दिया। उन्होंने कांग्रेस को दिल्ली में सिखों की 'क्रूर हत्या' के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसके कारण उन्हें राष्ट्रीय राजधानी से पलायन करना पड़ा था।
निंदा
शाह ने की सिख विरोधी दंगों की बरसी पर रैली करने की निंदा
शाह ने INDIA गठबंधन द्वारा 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी (1, 2 और 3 नवंबर) के दिन रैली का आयोजन करने की कड़ी निंदा की।
उन्होंने बताया कि भाजपा ने पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष से अनुरोध किया था कि वे इन तारीखों पर रैली न करें, क्योंकि इससे सिख समुदाय की माताओं, बहनों और बच्चों की भावनाएं गहराई से आहत होंगी। हालांकि, विपक्ष ने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया और अपने फैसले पर अड़ा रहा।
साजिश
शाह ने रैली को बताया विदेशी साजिश
शाह ने जनसभा में कहा, "विपक्ष को ठीक उसी दिन रैली करने के आदेश विदेश से जारी किए गए थे, जिस दिन हजारों सिखों को जिंदा जला दिया गया था। गुरुओं की इस पवित्र धरती से, मैं इस घृणित प्रयास की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। भारत और पंजाब इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।"
उन्होंने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष केवल देश में झूठ और अराजकता फैलाने का काम कर रहा है।
तंज
राजीव गांधी के पुराने बयान पर कसा तंज
शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा, "जब सिख विरोधी दंगे हो रहे थे, तब उन्होंने कहा था कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है। केवल कांग्रेस सिखों के इतने बड़े नरसंहार को इस तरह परिभाषित कर सकती है।"
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दंगाइयों के खिलाफ बंद पड़े सभी मामलों को दोबारा खुलवाया और प्रत्येक पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान दी।"
हमला
राहुल गांधी और प्रतीकात्मक संसद पर निशाना
विपक्ष द्वारा हाल ही में आयोजित प्रतीकात्मक संसद पर कटाक्ष करते हुए शाह ने कहा, "वह पिछले 15 वर्षों से यानी प्रभावी रूप से तीन चुनावों से लगातार हार रहे हैं। सोनिया गांधी का अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनते देखने का सपना अभी भी अधूरा है। मैं राहुल गांधी से कहना चाहता हूं कि अगर आप प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, तो जीवन भर इसी प्रतीकात्मक संसद में बैठे रहिए, क्योंकि वास्तविक रूप में आपकी बारी कभी नहीं आने वाली है।"