चुनाव आयोग बोला- विचारों का मतभेद सामान्य बात, रिपोर्ट में केवल एक पहलू ही दिखाया गया
क्या है खबर?
कई मुद्दों पर 2 चुनाव आयुक्तों की आपत्ति वाली रिपोर्ट पर चुनाव आयोग का बयान सामने आया है। आयोग ने कहा कि वो एक संवैधानिक संस्था है जो संविधान के अनुच्छेद 324, कानूनी नियमों और स्थापित परंपराओं के तहत काम करती है। आयोग ने कहा, "किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार बातचीत का आम हिस्सा हैं। सिर्फ 3 आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।"
बयान
आयोग बोला- सभी फैसले एकमत से लिए गए
आयोग ने कहा, "10 महीने के समय में फैले कुछ खास आंतरिक नोट्स को हाईलाइट करना और फैसलों, आदेशों और पहलों के बहुत बड़े समूह को नजरअंदाज करना, तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा दिखाता है। हालिया महीनों में, आयोग ने कई फैसले लिए हैं, आदेश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहल शुरू की हैं और देशभर में SIR सहित कई सुधार किए हैं। ये सभी फैसले पूरे आयोग के एकमत से लिए गए फैसलों का नतीजा हैं।"
फैसले
आयोग ने कहा- संवैधानिक कामों को ईमानदारी से करने के लिए तैयार
आयोग ने कहा, "आयोग ने हाल ही में बिहार, केरलम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल के बड़े चुनाव और इस दौरान SIR सफलतापूर्वक की है। इस काम में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और प्रणालीगत मशीनरी और कई मंजूरियां और निर्देश शामिल थे। भारत का चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कामों को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है और हमारे लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका को पहचानता है।"
विपक्ष
विपक्ष ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
रिपोर्ट पर विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा है।
कांग्रेस ने कहा कि एक पूरे व्यक्ति ने चुनाव आयोग को हाइजैक कर लिया है, क्या बाकी के 2 चुनाव आयुक्त केवल देखने के हैं।
AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही चुनाव आयोग को चला रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा, 'इसे अंजाम देने वाले भाजपा, RSS और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।'
विवाद
क्या है चुनाव आयोग से जुड़ी रिपोर्ट पर विवाद?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त डॉक्टर सुखबीर सिंह संधू और डॉक्टर विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने जिन मुद्दों पर आपत्ति जताई उनमें नए मतदाताओं का पंजीयन, मतदाता सूची से नाम हटाना और जोड़ना और SIR प्रक्रिया में मतदाता का नाम वापस जोड़ने के आदेशों के खिलाफ अपील करना जैसै मुद्दे शामिल थे।