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होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बंद, भारत के पास क्या-क्या हैं विकल्प?
होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस का परिवहन होता है

होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बंद, भारत के पास क्या-क्या हैं विकल्प?

लेखन आबिद खान
Mar 04, 2026
06:23 pm

क्या है खबर?

इजरायल और अमेरिका से चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इसके बाद वैश्विक तेल बाजार को चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस का परिवहन होता है। ईरान के इस कदम से भारत पर भी असर पड़ना तय है, क्योंकि भारत भी इस रास्ते से तेल आयात करता है। आइए जानते हैं भारत के पास क्या विकल्प हैं।

केप ऑफ गुड होप

क्या केप ऑफ गुड होप के जरिए तेल आयात करेगा भारत?

केप ऑफ गुड होप दक्षिण अफ्रीका के अटलांटिक तट पर स्थित भूभाग है। पुर्तगाली खोजकर्ता बार्टोलोम्यू डियास ने 1480 के दशक में इसे केप ऑफ स्टॉर्म्स नाम दिया था। बाद में पुर्तगाल के राजा जॉन द्वितीय ने इसका नाम बदलकर केप ऑफ गुड होप रख दिया, क्योंकि इसने भारत और एशिया के लिए एक समुद्री मार्ग खोल दिया था। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य की तुलना में ये लंबा और खर्चीला रास्ता है।

नुकसान

केप ऑफ गुड होप से आयात में क्या हैं नुकसान?

स्वेज नहर से जहाजों का आवागमन शुरू होने से पहले केप ऑफ गुड होप ही भारत और एशिया के बीच सबसे किफायती समुद्री मार्ग था। हालांकि, स्वेज नहर ने भूमध्य सागर से हिंद महासागर तक छोटा और सुरक्षित रास्ता प्रदान किया, जिससे सफर का समय और खर्च दोनों कम हुआ। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केप ऑफ गुड होप से भारत से यूरोप की यात्रा में 15-20 दिन ज्यादा लगते हैं।

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भंडार

क्या भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार है?

एक सरकारी सूत्र ने द हिंदू को बताया कि भारत के पास अगले 25 दिनों के लिए कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों का पर्याप्त भंडार है। पोत ट्रैकिंग सेवा केप्लर के अनुसार, भारत के पास लगभग 10 करोड़ बैरल वाणिज्यिक तेल का भंडार है, जो भंडारण टैंकों में, भूमिगत रणनीतिक भंडारों में और देश की ओर जाने वाले जहाजों में है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो इससे 40-45 दिनों तक जरूरत पूरी की जा सकती है।

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तेल

होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कितना तेल भारत आता है?

भारत हर साल लगभग 2 अरब बैरल तेल आयात करता है, जो इसकी कुल जरूरत का 88 प्रतिशत है। पोत ट्रैकिंग सेवा केपलर के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यानी रोजाना 25 से 27 लाख बैरल तक। भारत जो तेल इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत से खरीदता है, वो इसी रास्ते से आता है।

रूस

क्या रूस से तेल खरीदेगा भारत?

अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत के सामने सबसे बड़ा विकल्प रूस है। भारत पहले भी भारी मात्रा में रियायती दरों पर रूस से तेल खरीदता रहा है। फिलहाल भी रूस ने ये विकल्प रखा है। हालांकि, रूस से तेल खरीदने से अमेरिका की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, क्योंकि भारत-अमेरिका में हुए अंतरिम व्यापार समझौते में एक शर्त ये भी है कि भारत रूसी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करेगा।

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