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राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट में नहीं हुई सूचीबद्ध
राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां पाई गई

राहुल गांधी की याचिका में 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट में नहीं हुई सूचीबद्ध

लेखन Manoj Panchal
Oct 12, 2026
11:48 pm

क्या है खबर?

सोमवार (12 अक्टूबर) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बाराखंभा से सुप्रीम कोर्ट तक 'दिल्ली चलो' मार्च का आह्वान किया था, जिसमे हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाने के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की याचिका दायर की गई। अब सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका में 14 खामियां बताई हैं, इसलिए याचिका अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई।

कमियां 

220 रुपये की कोर्ट फीस कम, 9 नेताओं के वकालतनामे गायब

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कोर्ट फीस के तौर पर 220 रुपये कम जमा होने की बात कही है। इसके अलावा, 9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे गायब या बिना हस्ताक्षर के पाए गए हैं।

वकालतनामा वह दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई वकील अदालत में अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार प्राप्त करता है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति भी मांगी गई है।

अन्य कमियां 

दस्तावेजों में भी मिलीं कई खामियां

रजिस्ट्री ने याचिका के दस्तावेजों में छोटे फॉन्ट, धुंधले टेक्स्ट, गायब पन्नों और पन्नों की गलत नंबरिंग जैसी खामियां बताई हैं।

2 दस्तावेजों की रंगीन प्रतियां भी जमा नहीं की गई थीं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे पन्नों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।

इन सभी कमियों को दूर करने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा।

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याचिका 

याचिका में किन लोगों को बनाया गया पक्षकार?

याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और उनमें बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, रजिस्ट्री की आपत्तियां याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं। ये आपत्तियां याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत का फैसला नहीं हैं।

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याचिका में मांग 

स्वतंत्र समिति से जांच कराने की मांग

राहुल और अन्य विपक्षी नेताओं ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

समिति तय समयसीमा में मतदाता सूची से नाम हटाने और उसमें किए गए बदलावों का ऑडिट करे। याचिका में SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत में पेश करने और प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच करने की मांग भी की गई है।

उदाहरण 

पंजाब में 20.66 लाख नाम घटने का दावा

याचिका में पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि 13 अगस्त, 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में जून में दर्ज लगभग 2.14 करोड़ मतदाताओं की तुलना में करीब 20.66 लाख नाम कम थे।

विपक्ष ने इसे मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बताया है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा राहुल और मल्लिकार्जुन से मुलाकात से इनकार करने के बाद दाखिल की गई है।

मामला 

दिल्ली में प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विपक्ष

राहुल समेत INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने 12 अक्टूबर को दिल्ली में मार्च निकाला और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

इससे पहले नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके बाद विपक्ष ने याचिका दाखिल की।

अब सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने से पहले बताई गई खामियों को दूर करना होगा।

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