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रानी मुखर्जी का 30 साल पुराना राज, बोलीं- मां ने कहा था इसे कुछ नहीं आता
रानी मुखर्जी ने की अपने करियर पर बात

रानी मुखर्जी का 30 साल पुराना राज, बोलीं- मां ने कहा था इसे कुछ नहीं आता

Jan 16, 2026
07:52 pm

क्या है खबर?

रानी मुखर्जी की हिट फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म 'मर्दानी 3' रिलीज के लिए तैयार है, लेकिन इससे पहले रानी ने अपने 30 साल के फिल्मी सफर को लेकर कुछ बड़े खुलासे किए हैं। एक समय ऐसा था, जब रानी को लगता था कि फिल्मों में आना कोई सम्मानजनक पेशा नहीं है, लेकिन अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने और घर की आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में कैमरे का सामना किया।

प्रस्ताव

रानी को कब मिला पहली बार फिल्म का प्रस्ताव?

अमर उजाला काे दिए इंटरव्यू में रानी ने कहा, "आज जब 30 साल बाद मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे खुद हैरानी होती है कि मेरा सफर कितना अनोखा रहा है। मुझे आज भी याद है, जब मैं 10वीं क्लास में पढ़ रही थी, तब मुझे जुगल हंसराज के अपोजिट फिल्म 'आ गले लग जा' का प्रस्ताव मिला था। उस वक्त मेरी उम्र सिर्फ 16 साल थी और फिल्मों के बारे में मैंने कभी सोचा तक नहीं था।"

दो टूक

"मेरे दौर में फिल्मों में काम करना सम्मानजनक पेशा नहीं था"

रानी बोलीं, सच कहूं तो फिल्म का ऑफर सुनकर मुझे गहरा झटका लगा था, क्योंकि मैं तब स्कूल में थी। एक्टिंग की दुनिया से बिल्कुल अनजान थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रानी बोलीं, आज हर कोई एक्टर बनना चाहता है, लेकिन मेरे समय में फिल्म इंडस्ट्री को सम्मानजनक करियर नहीं माना जाता था। तब परिवार फिल्मों में आने के फैसले को खुशी-खुशी नहीं अपनाते थे, जबकि आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।"

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मौका

मम्मी की ना, किस्मत का हां

रानी बोलीं, "12वीं में पढ़ते वक्त मुझे 'राजा की आएगी बारात' का प्रस्ताव मिला, जिसे मैंने मम्मी की सलाह पर स्वीकार किया। मां ने कहा था कि मौका कभी छोड़ना नहीं चाहिए, लेकिन मजेदार बात ये है कि जब मैंने स्क्रीन टेस्ट दिया, तो मेरी मम्मी खुद निर्माता सलीम अंकल के पास जाकर कह आई थीं कि मेरी बेटी बहुत खराब है, इसे मत लीजिए, इसे कुछ नहीं आता। खुशनसीबी से मम्मी की ना के बावजूद उन्हें मैं पसंद आई।"

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अहसास

रानी को गुजरते समय के साथ हुआ अपनी जिम्मेदारी का अहसास

रानी के करियर की शुरुआत का मकसद अपने माता-पिता को एक बेहतर जिंदगी देना था। यही वजह रही कि उन्होंने अपने शुरुआती साल उनके सपनों को पूरा करने में लगा दिए। समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि दर्शक उनसे बेहतर काम की उम्मीद रखते हैं। इसी समझ के बाद रानी ने अच्छी कहानियों और मजबूत किरदारों को प्राथमिकता दी। फिल्म 'साथिया' के बाद उनकी फिल्मों की दिशा बदली और अभिनय उनके लिए खुद को तलाशने का जरिया बन गया।

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