'द राजा साब' के लिए प्रभास का करोड़ों का बलिदान, फिल्म से प्यार या कुछ और?
क्या है खबर?
प्रभास ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो केवल अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बड़े दिल के लिए भी जाने जाते हैं। प्रभास ने 'द राजा साब' के लिए अपनी तय फीस में लगभग 33 फीसदी की भारी कटौती की है। आखिर प्रभास ने करोड़ों का ये बड़ा बलिदान क्यों दिया? क्या यह सिर्फ फिल्म के प्रति उनका जुनून है या फिर बजट न बढ़े, इसलिए उन्होंने खुद को पीछे खींच लिया?
फीस
बजट के लिए फीस में की भारी कटौती
दरअसल, 'द राजा साब' में भारी-भरकम VFX का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म के निर्देशक मारुति एक भव्य सिनेमाई अनुभव देना चाहते थे, लेकिन गुणवत्ता से समझौता किए बिना बजट को नियंत्रण में रखना बड़ी चुनौती थी। जब प्रभास को ये अहसास हुआ तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी फीस में कटौती का प्रस्ताव रख दिया। उनका उद्देश्य था निर्माताओं पर आर्थिक बोझ कम करना ताकि वो पैसा फिल्म की प्रोडक्शन वैल्यू और तकनीक पर खर्च किया जा सके।
त्याग
करोड़ों का बलिदान भी नहीं बचा पाया फिल्म की साख
आज तक के मुताबिक, प्रभास ने इस फिल्म के लिए अपनी नियमित फीस 150 करोड़ से घटाकर करीब 100 करोड़ कर दी ताकि वो पैसा फिल्म के भव्य सेट्स, VFX और प्रोडक्शन पर लगाया जा सके। प्रभास चाहते थे कि फिल्म किसी चमत्कार जैसी दिखे। हालांकि, इतना बड़ा त्याग और बजट पर इतना ध्यान देने के बावजूद परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं। एड़ी चोटी का जोर लगाने के बावजूद 'द राजा साब' दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी
रकम
फिल्म में किसे मिली कितनी फीस?
फिल्म में खूंखार विलेन बने संजय दत्त को इस रोल के लिए 5 से 6 करोड़ के बीच भुगतान किया गया है, वहीं अभिनेत्रियों की बात करें तो रिद्धि कुमार को फिल्म के लिए 3 करोड़ मिले हैं। मालविका मोहनन की फीस 2 करोड़ और निधि अग्रवाल ने 1 से 1.5 करोड़ के बीच चार्ज किया है। बोमन ईरानी को 1 करोड़ तो कॉमेडी के सरताज ब्रह्मानंदम को उनकी भूमिका के लिए करीब 80 लाख रुपये मिले हैं।
राह
क्या हिट हो पाएगी 'द राजा साब'?
फैंस की भारी दीवानगी की बदौलत फिल्म ने पहले दिन 53 करोड़ कमााए। हालांकि, दूसरे दिन इसका कारोबार गिरकर 27 करोड़ रह गया। 2 दिनों में फिल्म की कमाई 90.75 करोड़ हो गई है। करीब 400 करोड़ के बजट में बनी 'द राजा साब' के लिए आगे की राह आसान नहीं है। लागत निकालने के लिए फिल्म का लंबे समय तक टिके रहना जरूरी है, लेकिन दूसरे ही दिन की 50 फीसदी गिरावट ने खतरे की घंटी बजा दी है।