मनोज बाजपेयी की फीस पर खरी-खरी, बाेले- औकात से 5 रुपये भी ज्यादा नहीं मिलते यहां
क्या है खबर?
आज भले ही OTT से लेकर बड़े पर्दे तक मनोज बाजपेयी का नाम गूंजता हो, लेकिन इस चमक के पीछे मीलों लंबा संघर्ष छिपा है। एक दौर ऐसा भी था, जब काम की तलाश उन्हें मीलों पैदल चलने पर मजबूर कर देती थी। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने पुरानी यादों की धूल झाड़ते हुए बताया कि कैसे वो अपनी उदासी दूर करने के लिए 10-10 किलोमीटर पैदल जाते थे। इसके साथ ही उन्होंने सितारों की फीस पर भी बात की।
सफर
अंधेरी की तंग खोली से स्टारडम तक
मनोज का एक दौर अंधेरी के डीएन नगर की उस तंग खोली में गुजरा है, जहां एक कमरे में 8-10 लोग रहते थे। NBT से मनोज बोले, "वो दौर सिर्फ गरीबी का नहीं, बल्कि गहरी निराशा का था। दिल्ली के थिएटर से मुंबई के सिनेमा तक का सफर इतना कठिन था कि काम न मिलने पर मुझे अपनी ही काबिलियत पर शक होने लगा था। सबसे डरावना वाे वक्त होता है, जब काम न हो और जेब खाली हो।"
संघर्ष
संघर्ष के दिनों में भूखे रहे मनोज
मनोज ने बताया कि कठिन दौर में सौरभ शुक्ला और विनीत कुमार जैसे दोस्तों ने न सिर्फ उन्हें खाना खिलाया, बल्कि टूटने से भी बचाया। उन्होंने कहा कि कभी केले, कभी वड़ा पाव से गुजारा होता था और कई रातें भूखे पेट गुजर जाती थीं। फिल्मी दफ्तरों के चक्कर काटना किसी सजा से कम नहीं था। घंटों इंतजार के बाद सिर्फ पोर्टफोलियो थमाकर लौटा दिया जाता था। उन 4-5 सालों के संघर्ष ने उन्हें भूख और अपमान दोनों झेलना सिखाया।
उपलब्धि
मनोज के संघर्ष को मिली पहली जीत
मनोज के लिए अपनी फिल्म का पहला पोस्टर देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि जैसा था। वो बोले, "जब 'सत्या' का पहला पोस्टर जुहू सर्कल पर लगा तो वो खुशी से कूद पड़े। मनोज तुरंत अपने दोस्तों के साथ वहां पहुंचे और बीच सड़क पर ही बियर की बोतल खोलकर उस पोस्टर के सामने अपनी पहली बड़ी सफलता का जश्न मनाया।" उनके लिए वो पोस्टर सिर्फ एक विज्ञापन नहीं, बल्कि बरसों के कड़े संघर्ष की जीत का प्रतीक था।
दाे टूक
एक्टर की कीमत बाजार तय करता है- मनोज
मनोज ने कहा कि करियर की शुरुआत में उन्होंने कई फिल्मों के लिए फीस से समझौता किया और कुछ में अपना पैसा भी लगाया और अब वो पैसे की बात किए बिना घर से बाहर कदम नहीं रखते। मनोज ने कहा कि उन्होंने कई स्वतंत्र फिल्मों में अपना पैसा लगाया। पैसों के मामले में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन उनका मानना है कि अपनी फीस कोई भी अभिनेता खुद तय नहीं करता, बल्कि बाजार उसकी कीमत तय करता है।
फीस
"एक्टर खुद अपनी फीस तय नहीं करता"
मनोज ने कहा, "बॉलीवुड में कोई भी अभिनेता अपनी औकात से 5 रुपये भी ज्यादा नहीं मांग सकता। फिल्म इंडस्ट्री का मार्केट गणित बहुत स्पष्ट है। निवेशक किसी कलाकार पर उतना ही पैसा लगाते हैं, जितना उन्हें उस कलाकार के नाम से वापस मिलने का भरोसा होता है। अगर कोई एक्टर करोड़ों ले रहा है तो वो उसका हकदार होता है, क्योंकि मार्केट उसे देने के लिए तैयार है। एक्टर की कीमत मार्केट वैल्यू के हिसाब से तय होती है।"
जानकारी
'पुलिस स्टेशन में भूत' में नजर आएंगे मनाेज
अपनी संजीदा अदाकारी और 'द फैमिली मैन' जैसी सीरीज से दर्शकों का दिल जीतने वाले मनोज अब एक बिल्कुल अलग अवतार में नजर आने वाले हैं। उनकी अगली फिल्म का नाम 'पुलिस स्टेशन में भूत' रखा गया है। फिल्म के निर्देशक राम गोपाल वर्मा हैं।