
'बवाल' को लेकर विवाद, यहूदी मानवाधिकार संगठन की फिल्म को अमेजन प्राइम से हटाने की मांग
क्या है खबर?
नितेश तिवारी की फिल्म 'बवाल' बीते हफ्ते अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी, जिसमें वरुण धवन और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए हैं।
फिल्म में आधुनिक रिश्तों और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एडॉल्फ हिटलर के अत्याचारों के बीच तुलना करने के चलते विवाद खड़ा कर दिया है।
अब यहूदी मानवाधिकार संगठन ने फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग करते हुए नितेश पर मारे गए यहूदियों की स्मृति को धूमिल करने का आरोप लगाया है।
विरोध
इस वजह से हो रहा फिल्म का विरोध
'बवाल' में दिखाया गया है कि वरुण (अजय) और जाह्नवी (निशा) उन जगहों पर जाते हैं, जहां द्वितीय विश्व युद्ध होता है।
ऐसे में एक सीन में निशा कहती है, "हम सब कुछ हद तक हिटलर की तरह हैं, है ना?"
इसी तरह एक जगह वह कहती हैं, "हर रिश्ता अपने ऑश्विच से गुजरता है।"
फिल्म में गैस चैंबर में होने वाली क्रूरता को इनके रिश्ते में बदलाव के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसको लेकर आपत्ति जताई जा रही है।
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तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग
साइमन विसेन्थल सेंटर के एसोसिएट डीन और ग्लोबल सोशल एक्शन के निदेशक, रब्बी अब्राहम कूपर ने अमेजन से तत्काल प्रभाव से बवाल की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग की है।
उन्होंने आधिकारिक बयान जारी कर फिल्म में द्वितीय विश्व युद्ध के संदर्भों का उपयोग करने की निंदा की।
उनका कहना है कि इस फिल्म से नितेश ने 6 लाख मारे गए यहूदियों और हिटलर के नरसंहार शासन के हाथों पीड़ित लाखों अन्य लोगों की स्मृति को अपमानित किया है।
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नितेश पर लगा फिल्म का PR करने का आरोप
नितेश पर निशाना साधते हुए संगठन की ओर से जारी बयान में आगे कहा गया है कि अगर फिल्म निर्माता का लक्ष्य कथित तौर पर नाजी मृत्यु शिविर में एक काल्पनिक दृश्य फिल्मकार अपनी फिल्म के लिए PR हासिल करना था तो वह सफल हो गए हैं।
अमेजन प्राइम वीडियो को नाजी नरसंहार के लाखों पीड़ितों की पीड़ा और व्यवस्थित हत्या के इस तुच्छीकरण को तुरंत हटाकर 'बवाल' की स्ट्रीमिंग बंद कर देना चाहिए।
जानकारी
क्या काम करता है संगठन?
साइमन विसेन्थल सेंटर एक यहूदी मानवाधिकार संगठन है, जो दुनियाभर में यहूदियों की रक्षा और सुरक्षा के लिए काम करता है। यह संगठन नरसंहार के दौरान मारे गए लोगों की स्मृति को संरक्षित करने की दिशा में भी काम करता है।
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निर्देशक ने दी थी सफाई
नितेश ने फिल्म में दिखाए गए ऑश्विच के दृश्यों के बारे में कहा था कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
उन्होंने कहा, "क्या हम नहीं देखते कि अज्जू और निशा ऑश्विच में जो देखते हैं उससे पूरी तरह परेशान हो जाते हैं? वे देखते हैं कि कैदियों को किस तरह ठूंसा जाता था, उन पर कैसे अत्याचार हुए थे, क्या वे इसे लेकर असंवेदनशील होते हैं? नहीं, उनकी आंखों में आंसू होते हैं।"
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वरुण और जाह्नवी ने भी किया था बचाव
वरुण ने 'ओपेनहाइमर' के इंटिमेट सीन के दौरान आए गीता के श्लोक की ओर इशारा करते हुए कहा कि हाल ही में आई फिल्म में भी ऐसा सीन है, जिसे देख दर्शकों का नाराज होना बनता था, लेकिन वो सब चलता है। तब आलोचनाएं कहां चली जाती हैं?
जाह्नवी कपूर ने बताया कि उन्होंने आइवी लीग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से फिल्म के बारे में बात की, जिनके पूर्वज जीवित नहीं बचे थे। वह इससे नाराज नहीं, बल्कि प्रभावित हुए थे।