केरल विधानसभा चुनाव: UDF में सीट बंटवारा हुआ; कांग्रेस को 95, IUML को 27 सीटें मिलीं
क्या है खबर?
केरल में विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइडटेड डेमोक्रेटिक फ्रंक (UDF) में सीट बंटवारे पर मुहर लग गई है। कांग्रेस राज्य की कुल 140 सीटों में से 95 पर चुनाव लड़ने जा रही है, जो 2021 की तुलना में 2 ज्यादा हैं। वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को पिछली बार की तरह 27 और पीजे जोसेफ के नेतृत्व वाली केरल कांग्रेस (KC) को 8 सीटें मिली हैं।
RSP
RSP को 5, अन्य पार्टियों को मिली इतनी सीटें
शिबू बेबी जॉन के नेतृत्व वाली क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (RSP) को 5 सीटें मिली हैं। पारंपरिक रूप से RSP कन्नूर जिले की मट्टन्नूर सीट से चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार पार्टी पय्यानूर सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के बागी नेता वी कुन्हीकृष्णन का समर्थन करेगी। मट्टन्नूर सीट कांग्रेस को मिली है। इसके अलावा केरल कांग्रेस (जैकब), कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी (CMP), क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी (RMP), केरल कांग्रेस (M) और तृणमूल कांग्रेस को एक-एक सीट मिली है।
बंटवारा
इन सीटों पर कांग्रेस-KC में हुई अदला-बदली
विपक्ष के नेता वीडी सतीशान ने बताया कि KC को 8 सीटें आवंटित की गईं, जो 2021 की तुलना में 2 कम हैं। सतीशान ने कहा कि एट्टुमानूर और इडुक्की सीट, जहां पिछली बार KC ने चुनाव लड़ा था, वो इस बार कांग्रेस को मिली है। वहीं, त्रिक्कारिपुर सीट कांग्रेस से KC को, जबकि कान्हांगड सीट KC से कांग्रेस को दी गई है। सतीशान ने कहा कि इस बार सीट बंटवारे पर बातचीत बहुत सहज रही।
LDF
LDF ने 137 सीटों पर घोषित किए उम्मीदवार
केरल में 9 अप्रैल को चुनाव होंगे। सत्ताधारी LDF ने पहले ही 137 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। वहीं, भाजपा ने भी 86 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। LDF में CPI (M) 86 सीटों पर चुनाव लड़ी रही है। उसके बाद CPI 25, KC (M) 12, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) 3, JD (S), NCP और INL के पास 3-3, और LJD, NCS, KC (B), कांग्रेस (S) और JKC के पास एक-एक सीट है।
केरल
केरल में 140 सीटों पर 9 अप्रैल को चुनाव
केरल में सभी 140 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पिछले चुनाव में LDF ने 99 और UDF ने 41 सीटें जीती थीं। भाजपा अभी तक यहां एक भी सीट नहीं जीती है। LDF के लिए यह चुनाव लगातार तीसरी बार सत्ता बनाए रखने की चुनौती है, जो पहले कभी नहीं हुआ। LDF ने 2021 में सत्ता में वापसी कर लंबे समय से चली आ रही सरकार बदलने की परंपरा को तोड़ा था।