ZEE5 से 'सतलुज' हटते ही छिड़ी बहस, निर्देशक बोले- 'क्या सच से डरी सत्ता?'
निर्देशक हनी त्रेहान ने ZEE5 पर अपनी फिल्म 'सतलुज' को रिलीज के सिर्फ 2 दिन बाद ही हटाए जाने की कड़ी निंदा की है।
यह फिल्म कार्यकर्ता जसविंत सिंह खालरा के जीवन और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ उनकी लड़ाई पर आधारित है।
पंजाब और आसपास के इलाकों में हुई कम्युनिटी स्क्रीनिंग में दर्शकों ने फिल्म को खूब सराहा, लेकिन हैरानी की बात है कि इसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
'सतलुज' हटाने से सेंसरशिप की छिड़ गई बहस
हनी का कहना है कि फिल्म से देश की सुरक्षा को खतरा होने के दावे निराधार हैं। उन्होंने साफ किया कि फिल्म किसी पूरी व्यवस्था को नहीं, बल्कि कुछ खास गलत कार्रवाइयों पर निशाना साधती है।
उनका मानना है कि फिल्म पर पाबंदी दरअसल 'डर' की वजह से लगाई गई है, क्योंकि सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते कि जनता एकजुट हो या कोई कड़वा सच सामने आए।
इस कदम से पूरे देश में यह बड़ी बहस छिड़ गई है कि सेंसरशिप कौन तय करेगा और देश की कहानियों को कहने का अधिकार किसके पास है।