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शेखर सुमन और भारती सिंह को 14 साल पुराने केस में कोर्ट से राहत, FIR रद्द
भारती सिंह और शेखर कपूरबलाफ दर्ज सालों पुरानी FIR रद्द

शेखर सुमन और भारती सिंह को 14 साल पुराने केस में कोर्ट से राहत, FIR रद्द

May 01, 2026
01:22 pm

क्या है खबर?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेता शेखर सुमन और कॉमेडियन भारती सिंह के खिलाफ दर्ज हेट स्पीच (भड़काऊ भाषण)) की FIR को रद्द कर दिया है। ये मामला एक पुराने 'रसगुल्ला' जोक से जुड़ा था, जिस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मनोरंजन के उद्देश्य से किए गए ऐसे कटाक्ष नफरत फैलाने की श्रेणी में नहीं आते। इस फैसले के साथ ही दोनों सितारों को सालों पुराने कानूनी विवाद से मुक्ति मिल गई है।

सुनवाई

मजाक करना अपराध नहीं- कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शेखर और भारती के खिलाफ 2012 में दर्ज 'हेट स्पीच' (भड़काऊ भाषण) के एक पुराने मामले को रद्द कर दिया है। यह मामला सोनी टीवी के मशहूर शो 'कॉमेडी सर्कस का जादू' में किए गए एक मजाक से जुड़ा था। जज ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कलाकारों के इस 'कॉमिक एक्ट' से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुुंचाने) के तहत कोई अपराध सिद्ध नहीं होता।

स्पष्टीकरण

कोर्ट ने बताया कब बनता है धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का केस

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल इसलिए किसी कलाकार या शो के जज के खिलाफ आपराधिक कानून का इस्तेमाल लापरवाही से नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि किसी व्यक्ति को संदर्भ से हटकर देखे गए प्रदर्शन से अपमान महसूस हुआ हो। अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि किसी कार्य को अपराध मानने के लिए धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर निशाना बनाना और दुर्भावनापूर्ण इरादा होना अनिवार्य है, जो इस मामले में पूरी तरह नदारद था।

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टिप्पणी

"खाने की चीजों का कोई धर्म नहीं होता"

कोर्ट ने मामले की बारीकियों पर गौर करते हुए कहा कि जिन शब्दों पर आपत्ति जताई गई है, वे हैं 'या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!'। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं (शेखर और भारती) के इस तर्क को सही माना कि ये शब्द केवल तुकबंदी और हास्य प्रभाव पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि 'दही भल्ला' और 'रसगुल्ला' आम खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें हर समुदाय के लोग खाते हैं। इन शब्दों का कोई धार्मिक रंग नहीं है।

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कानूनी विवाद

14 साल पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत

अदालत ने ये फैसला शेखर और भारती द्वारा 2012 में दायर की गई याचिकाओं पर सुनाया है। इन याचिकाओं में साल 2010 में दर्ज उस FIR को चुनौती दी गई थी, जो रजा एकेडमी के अध्यक्ष मोहम्मद इमरान दादानी रसाबी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। विवाद 20 नवंबर, 2010 को प्रसारित एक एपिसोड से शुरू हुआ था। उस समय शेखर शो में जज थे, जबकि भारती ने एक परफॉर्मर के रूप में हिस्सा लिया था।

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