प्रीति जिंटा डीपफेक मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, कहा- प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना बर्दाश्त नहीं
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंटरनेट से बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा के AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाए गए सभी फर्जी डीपफेक फोटो और वीडियो को तुरंत हटाने का कड़ा आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस माधव जाम्दार ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के डीपफेक किसी भी व्यक्ति की निजी गरिमा, सम्मान और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को फटकार लगाते हुए याद दिलाया कि भारतीय IT नियमों के तहत अपनी साइट्स पर तकनीक के ऐसे गलत इस्तेमाल को रोकना और उसे तुरंत हटाना सीधेतौर पर उन्हीं की जिम्मेदारी है।
प्रीति जिंटा के वकील ने कोर्ट में क्या दलील दी?
कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रीति के वकील ने एक खुलासा करते हुए बताया कि लगभग 275 वेबसाइटें उनकी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर बिना किसी इजाजत के फर्जी कंटेंट फैला रही थीं। वकील ने दलील दी कि प्रीति ने पिछले 25 सालों की कड़ी मेहनत से जो अपनी साफ-सुथरी छवि बनाई है, उसके साथ ये सरासर नाइंसाफी और धोखा है।
इस गंभीर मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी पूरी तरह सहमति जताई कि हर नागरिक को अपनी पहचान, सम्मान और निजता की सुरक्षा का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने माना कि आज के AI के दौर में, जहां किसी का भी फर्जी कंटेंट बनाना और फैलाना बेहद आसान हो गया है, वहां इस तरह की कानूनी सुरक्षा और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है।