BAFTA 2026 में भारत की अकेली उम्मीद बनी 'बूंग', आखिर क्या खास है इस फिल्म में?
क्या है खबर?
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कारों में से एक ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स (BAFTA) 2026 के नामांकन की घोषणा हो चुकी है और इस बार भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जहां बड़ी-बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में इस दौड़ से बाहर हो गईं, वहीं फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी (एक्सेल एंटरटेनमेंट) के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'बूंग' ने BAFT में अपनी जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। फिल्म की कहानी में ऐसा क्या खास है, आइए जानते हैं।
गर्व
भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल
जब भी प्रतिष्ठित BAFTA के नामांकनों की घोषणा होती है तो पूरी दुनिया की नजरें वैश्विक सिनेमा के दिग्गजों पर टिकी होती हैं, लेकिन इस साल की सूची भारतीय सिनेमा के लिए एक गौरवशाली क्षण लेकर आई है। BAFTA 2026 के नामांकन में फरहान के प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी ड्रामा फिल्म 'बूंग' ने बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म की श्रेणी में नामांकन हासिल कर इतिहास रच दिया है। 'बूंग' इस साल नामांकन पाने वाली एकमात्र भारतीय फिल्म है।
ताकत
'बूंग' ने दुनिया तक पहुंचाई मणिपुर की आवाज
जहां हर साल कई बड़ी व्यावसायिक फिल्में इस दौड़ का हिस्सा बनती हैं, वहीं इस छोटी सी लेकिन प्रभावशाली फिल्म ने बिना किसी शोर-शराबे के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। जमीनी हकीकत को दर्शाती 'बूंग' वैश्विक ज्यूरी को प्रभावित करने में सफल रही। मणिपुर की पृष्ठभूमि पर बनी ये फिल्म साबित करती है कि अगर कहानी में दम हो तो वो भाषा और सीमाओं की बेड़ियों को तोड़कर दुनियाभर के दर्शकों के दिलों तक पहुंच सकती है।
कहानी
खुशियों की खोज में एक सफर
फिल्म मणिपुर के एक छोटे से लड़के बूंग के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी तब शुरू होती है, जब बूंग अपने परिवार को दोबारा खुश देखने की इच्छा रखता है। उसके पिता सालों से लापता हैं और उसकी मां अकेले संघर्ष कर रही है। बूंग को लगता है कि अगर वो अपने पिता को ढूंढ लाए तो उसके घर में खुशियां वापस आ जाएंगी। वो अपने दोस्त के साथ मिलकर पिता को खोजने के लिए एक साहसी यात्रा पर निकलता है।
खासियत
मणिपुर की मिट्टी से BAFTA तक, 'बूंग' ने जीता दिल
बहुत कम भारतीय फिल्में मणिपुर की संस्कृति और वहां के जीवन को इतनी सच्चाई से दिखा पाती हैं। बिना किसी बड़े सुपरस्टार के भी इसकी दमदार कहानी ने BAFTA जैसी प्रतिष्ठित संस्था का ध्यान खींचा है। ये फिल्म उम्मीद और संघर्ष की कहानी को वैश्विक मंच तक ले जाती है। इसकी निर्देशक लक्ष्मिप्रिया देवी हैं, जबकि बाल कलाकार गुगुन किपजेन ने 'बूंग' बनकर सबका दिल जीत लिया। फिल्म को TIFF 2024 में दिखाया गया था, जहां इसे स्टैंडिंग ओवेशन मिला।