कमजोर मानसून और महंगाई के कारण माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र पर संकट के बादल
ग्रामीण इलाकों के लोगों को छोटे कर्जे देने वाला भारत का 35 अरब डॉलर (करीब 3,200 अरब रुपये) का माइक्रोफाइनेंस सेक्टर इन दिनों मुश्किलों में घिरा है। कम बारिश की आशंका, खाने-पीने की चीजों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने कर्ज चुकाने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे कर्ज चुकाने में चूक (डिफॉल्ट) का जोखिम बढ़ गया है।
इस सेक्टर का ज्यादातर कारोबार ग्रामीण इलाकों में होता है और वहां के किसान, जिनके कर्ज खेती-बाड़ी से जुड़े हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
इन बैंकों को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान
कर्ज न चुकाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। खासकर उन लोगों की, जिन्होंने एक साथ कई कर्ज लिए हुए हैं। अगर, हालात और खराब होते हैं तो बंधन बैंक जैसे बड़े नाम और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण जैसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC-MFI) को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कर्ज देने वाली संस्थाओं ने पहले आई समस्याओं के बाद अपने नियमों को सख्त कर लिया था, लेकिन अब ये नई चुनौतियां उनके बचाव के इंतजामों की परीक्षा ले रही हैं।