छोटे कारोबारियों को दिवालिया कंपनियों से कम वसूली पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) के लिए अब अपना पैसा वापस पाना लगभग नामुमकिन-सा हो गया है। जब इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कोई बड़ी कंपनी दिवालिया हो जाती है तो इन छोटे कारोबारियों को उनके बकाये का 1 फीसदी से भी कम पैसा मिल पाता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन्हें 'ऑपरेशनल क्रेडिटर' यानि सिर्फ सप्लायर या ठेकेदार माना जाता है, जिससे बड़े और अहम फैसलों में इनकी कोई बात नहीं सुनी जाती है।
ऐसे में अब इन नियमों में बदलाव की मांग तेज हो गई है।
कोर्ट ने दिया सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है और साफ कहा है कि MSMEs को काफी हद तक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
कोर्ट ने सुझाव दिया है कि कानून बनाने वालों को इस गंभीर मामले में दखल देना चाहिए। हालांकि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और कानूनी जानकारों के लगातार दबाव के बावजूद कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय अभी तक कोई ठोस कदम आगे नहीं बढ़ा रहा है।
बहुत से लोग चाहते हैं कि भारत दुनियाभर के उन तरीकों को अपनाए, जिनसे इन छोटे कारोबारों को ज्यादा अधिकार मिलें और उनके पैसे वापस मिलने की उम्मीदें बढ़ें।