
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत 80 पार, जानें क्या असर पड़ेगा
क्या है खबर?
भारतीय रुपये की कीमत में गिरावट जारी है और ये अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 80 के आंकड़े को पार कर गया है। आज सुबह बाजार खुलने पर एक अमेरिका डॉलर की कीमत 80.01 रुपये थी।
80 का आंकड़ा एक मनोवैज्ञानिक बाधा थी और इसे पार करने के बाद रुपये की कीमत में अब और अधिक तेजी से गिरावट होने की आशंका है।
कल सोमवार को भी कुछ समय के लिए रुपये की कीमत ने 80 का आकंड़ा पार किया था।
गिरावट
मार्च से ही गिर रही है भारतीय रुपये की कीमत
भारतीय रुपये की कीमत में मार्च के बाद से ही गिरावट देखने को मिल रही है और ये कई बार अपने सबसे निचले स्तर को छू चुका है।
जनवरी में डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 74 के आसपास थी, लेकिन मार्च में ये पहली बार 77 से नीचे पहुंचा और तब से लगातार गिर रहा है।
77 के आंकड़े को पार करने के बाद रुपये की कीमत में तेजी से गिरावट आई है।
प्रयास
गिरावट को रोकने में असफल रहे हैं RBI के प्रयास
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये के मूल्य में गिरावट को रोकने के लिए तमाम प्रयास कर रहा है, हालांकि उसके सारे प्रयास विफल रहे हैं।
हाल ही में उसने देश में डॉलर का निवेश बढ़ाने के लिए विदेशी निवेशकों को शॉर्ट-टर्म कॉर्पोरेट कर्ज खरीदने की अनुमति दी थी। इसके अलावा उसने सौदों का भुगतान रुपये में करने की अनुमति भी दी है।
इससे पहले वह दो बार रेपो रेट में बदलाव कर चुका है और अब ये 4.90 प्रतिशत है।
कारण
क्यों गिर रही है रुपये की कीमत?
भारतीय रुपये की कीमत गिरने के कई कारण है। इसका एक अहम कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों जैसी वजहों से सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर में निवेश बढ़ा है।
इसके अलावा भारत से विदेशी निवेश के जाने और घरेलू बाजार में विदेशी निवेश के कम होने का असर भी पड़ा है। अक्टूबर 2021 से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 3.45 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है।
प्रभाव
रुपये में गिरावट का क्या असर पड़ेगा?
रुपये के कमजोर होने का मतलब है कि अब भारत को विदेश से पहले जितना माल खरीदने पर अधिक पैसा खर्च करना पड़ेगा। आयातित सामान के महंगा होने का सीधा असर लोगों की जेब पर भी पड़ेगा।
महंगाई बढ़ने पर रेपो रेट में भी इजाफा होगा और बैंकों से मिलने वाला ऋण महंगा हो जाएगा।
रुपये में गिरावट के कारण अमेरिका जैसे देशों में जाकर पढ़ाई करना भी महंगा होगा। इक्विटी बाजारों में तेज गिरावट की भी आशंका है।