डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलकर 96.53 पर पहुंचा
भारतीय रुपया बुधवार (22 जुलाई) को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.53 के स्तर पर आ गया। यह रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के काफी करीब पहुंच गया है।
रुपये में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें 94 डॉलर (करीब 8,900 रुपये) प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। कच्चे तेल के महंगा होने पर आयातकों को उसे खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।
महंगा तेल बढ़ा रहा है व्यापार घाटा और महंगाई
जब भी कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत का व्यापार घाटा और महंगाई दोनों बढ़ जाते हैं। इससे सभी के लिए जीवनयापन महंगा हो जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भले ही देश में ज्यादा विदेशी मुद्रा लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर, वैश्विक तनाव और उच्च बॉन्ड यील्ड्स बने रहते हैं तो रुपये पर दबाव बना रहेगा।