मध्य पूर्व संकट के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने डीलरों के लिए बदली भुगतान व्यवस्था
क्या है खबर?
भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने फ्यूल सप्लाई को लेकर नई शर्तें लागू करना शुरू कर दिया है। डीलरों के मुताबिक, अब पेट्रोल और डीजल की सप्लाई के लिए एडवांस पेमेंट मांगा जा रहा है। पहले डीलरों को कुछ दिनों का क्रेडिट मिलता था, लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इससे देश भर के हजारों पेट्रोल पंप संचालकों पर सीधा असर पड़ रहा है और उन्हें कारोबार चलाने में दिक्कतें आ रही हैं।
वजह
क्यों लिया गया यह फैसला?
बताया जा रहा है कि सरकारी कंपनियों को फ्यूल की रिटेल बिक्री में नुकसान हो रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। ऐसे में कंपनियों को लागत और बिक्री कीमत के बीच अंतर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। रुपये में गिरावट ने भी इस समस्या को और बढ़ा दिया है, जिससे कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
परेशानी
डीलरों पर बढ़ा दबाव और परेशानी
देश के करीब 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप सरकारी कंपनियों से जुड़े हैं, इसलिए इस फैसले का असर बड़े स्तर पर दिख रहा है। डीलरों का कहना है कि वे खुद भी कई ग्राहकों को उधार पर फ्यूल देते हैं, जैसे ट्रांसपोर्टर और सरकारी विभाग। ऐसे में एडवांस पेमेंट की शर्त से उनका कैश फ्लो प्रभावित हो रहा है। इससे छोटे डीलरों के लिए कारोबार चलाना और मुश्किल हो सकता है।
असर
वैश्विक हालात का भी पड़ रहा असर
ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल सप्लाई पर बड़े स्तर पर असर पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 100 डॉलर (लगभग 9,200 रुपये) प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद भारत में आम लोगों को राहत देने के लिए कीमतें स्थिर रखी गई हैं। हालांकि, इसका बोझ अब तेल कंपनियों और डीलरों पर पड़ रहा है। आने वाले समय में यह स्थिति फ्यूल सेक्टर पर और दबाव बढ़ा सकती है।