महानगरों से निकलकर अब छोटे शहरों में जगह तलाश रहे डाटा सेंटर
भारत में डाटा सेंटर अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और कड़े डाटा नियमों की वजह से इनकी मांग बढ़ती जा रही है, जिससे 2026 की पहली छमाही में ही नए सेंटर्स के लिए 120 एकड़ से ज्यादा जमीन बुक हो गई।
मुंबई और दिल्ली-NCR जैसे शहरों में जगह और बिजली की कमी की वजह से अब डेवलपर्स दूसरे शहरों में अपने बड़े प्रोजेक्ट्स बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
डाटा सेंटर की क्षमता 59 फीसदी बढ़ी
इस बढ़ोतरी का बड़ा श्रेय 'हाइपरस्केलर्स' यानि बड़ी टेक कंपनियों को जाता है, जिनकी मांग पहली छमाही में 80 फीसदी से ज्यादा रही।
डाटा सेंटर की क्षमता में 59 फीसदी का उछाल आया है, जिसमें मुंबई अभी भी आगे है, लेकिन अब डेवलपर्स भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए विशाखापट्टनम और नागपुर जैसे शहरों पर भी विचार कर रहे हैं।
2030 तक भारत की कुल क्षमता 7 गीगावाट से ऊपर जा सकती है, जिसका मतलब है कि अब सिर्फ पुराने हॉटस्पॉट्स ही नहीं, बल्कि कई और जगहों पर भी इस क्षेत्र में तेजी देखने को मिलेगी।