संसद में आर्थिक सर्वे पेश, GDP के 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान
क्या है खबर?
संसद के बजट सत्र के दौरान आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वे पेश किया है। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6.8 से लेकर 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स और कई नियामक सुधारों को इस रफ्तार के पीछे की वजह बताया गया है। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 1 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
आंकड़े
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, लेकिन देश का विकास मजबूत- सर्वे
सर्वे के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश की GDP 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। यह मौजूदा वित्त वर्ष के अनुमान से कम है। सरकार का मानना है कि इस साल अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो कि उम्मीद से बेहतर है। सर्वे में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता से गुजर रही है, लेकिन देश लगातार एक मजबूत विकास के रास्ते पर बना रहा है।
महंगाई
सर्वे में महंगाई को लेकर क्या कहा गया है?
सर्वे के मुताबिक, पिछले 4 सालों में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से मापी गई औसत खुदरा महंगाई में साफ गिरावट देखी गई है। खुदरा महंगाई वित्त वर्ष 2022-23 में 6.7 प्रतिशत से लगातार घटकर 2025-26 में 1.7 प्रतिशत (दिसंबर तक) हो गई है। सर्वे में कहा गया है कि नई CPI सीरीज से महंगाई के आंकड़ों पर असर पड़ेगा और मूल्यगत परिस्थितियों की व्याख्या में सतर्कता बरतने की जरूरत होगी।
AI
सर्वे में 16 अध्याय, पहली बार AI भी शामिल
आर्थिक सर्वे में कुल 16 अध्याय हैं। पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर एक अलग अध्याय शामिल किया गया है। इसमें AI से जुड़े अवसर और चुनौतियों पर विस्तार से विश्लेषण किया गया है। साथ ही ऑनलाइन गेमिंग और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी अलग से एक अध्याय शामिल किया गया है। इसके अलावा अलग-अलग देशों के साथ व्यापार समझौतों पर भी विशेष अध्ययन को जगह मिली है।
प्रधानमंत्री
आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं, समाधान है- प्रधानमंत्री
बजट सत्र को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। अब हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर तेज गति से चल पड़े हैं। देश लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से निकलकर लंबे समय के समाधान पर चल पड़ा है। इससे दुनिया का हमपर भरोसा और उम्मीद दृढ़ हो रही है। आज समय व्यवधान का नहीं, बल्कि समाधान का है।"
आर्थिक सर्वे
क्या होता है आर्थिक सर्वे?
आर्थिक सर्वे एक वित्त दस्तावेज होता है, जो देश की आर्थिक सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी देता है। आर्थिक सर्वे के 3 हिस्से होते हैं। पहले हिस्से में अर्थव्यवस्था के विकास की संभावनाओं, चुनौतियों और इसे रफ्तार देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी होती है। दूसरे हिस्से में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन और उससे जुड़े आंकड़े होते हैं और तीसरे हिस्से में रोजगार, महंगाई, आयात-निर्यात, बेरोजगारी और उत्पादन जैसी दूसरी जानकारियां होती हैं।