चीनी की कीमत पिछले साल मई के बाद एक सप्ताह में सबसे ज्यादा उछली
चीनी की कीमतें इस सप्ताह मई, 2025 के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी की ओर बढ़ रही हैं। इसकी कई वजहें हैं, जिनमें भारत में आपूर्ति की कमी सबसे बड़ी है।
साथ ही, मांग को लेकर अनिश्चितता और वास्तविक आपूर्ति की स्थिति भी इसमें शामिल है। दूसरी तरफ, ब्राजील में कारखाने अब इथेनॉल बनाने के बजाय ज्यादा गन्ना चीनी बनाने में लगा रही हैं क्योंकि अभी इसमें ज्यादा मुनाफा हो रहा है।
शुक्रवार को न्यूयॉर्क में चीनी वायदा सुबह के कारोबार में 1.2 फीसदी तक चढ़ गए। हालांकि, इससे पहले गुरुवार को कीमतें 18 सेंट्स प्रति पाउंड (करीब 38 रुपये प्रति किलोग्राम) के पार पहुंच गई थीं, जिसके बाद इनमें 2.1 फीसदी की गिरावट आई और ये 17.16 सेंट्स प्रति पाउंड (करीब 36 रुपये प्रति किलोग्राम) पर आ गए थे।
भारत ने टैक्स-फ्री चीनी आयात को दी मंजूरी
भारत ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी टैक्स-फ्री आयात करने का फैसला किया है। इसका मकसद त्योहारों के सीजन से पहले पर्याप्त आपूर्ति करना है। पहले, निर्यात और खराब फसल की वजह से देश के अंदर कीमतें बहुत बढ़ गई थीं।
दूसरी तरफ, ब्राजील में भी तस्वीर बदल रही है। वहां की मिलें अब इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी बनाने में ज्यादा गन्ना लगा रही हैं क्योंकि अभी चीनी बेचने में उन्हें ज्यादा मुनाफा दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय खरीदार भी मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग की दिक्कतों को लेकर चिंतित हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।