चीन ने दुर्लभ मृदा खनिजों पर लगाई पाबंदी, सप्लाई चेन हुई प्रभावित
चीन ने कुछ खास दुर्लभ मृदा खनिजों के निर्यात पर पाबंदी लगानी शुरू कर दी है। इनमें इट्रियम, टर्बियम और डिस्प्रोसियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।
ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर्स, हवाई जहाजों के पुर्जे, रक्षा प्रणालियों, मेडिकल उपकरणों, विंड टर्बाइन, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और सैन्य हार्डवेयर जैसे उत्पादों के लिए बेहद अहम होते हैं।
अप्रैल, 2025 से इन खनिजों के निर्यात के लिए कंपनियों को विशेष लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम से दूसरे देशों के लिए इन्हें हासिल करना मुश्किल हो गया है, जिसका सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है और उनमें देरी हो रही है।
दुर्लभ मृदा के दाम बढ़े, निर्यात घटा
इन नए नियमों के चलते दुर्लभ मृदा खनिजों के दाम काफी बढ़ गए हैं। टर्बियम की कीमत 350 फीसदी बढ़कर 4,500 डॉलर (करीब 4.2 लाख रुपये) प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
डिस्प्रोसियम का दाम 450 फीसदी उछलकर 1,450 डॉलर (करीब 1.3 लाख रुपये) प्रति किलोग्राम हो गया है और इट्रियम भी 1,100 डॉलर (करीब एक लाख रुपये) प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है।
खनिजों के निर्यात में भी तेजी से गिरावट आई है। इट्रियम और टर्बियम का निर्यात आधा हो गया है, जबकि डिस्प्रोसियम का निर्यात 60 फीसदी तक घट गया है।
भले ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत जैसे कई देशों में दुर्लभ मृदा के भंडार मौजूद हैं, लेकिन दुनियाभर के कुल दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण का लगभग 90 फीसदी हिस्सा आज भी चीन के पास है।