कच्चे तेल का स्विंग आयातक बनकर चीन ने दुनिया को दिखाई नई राह
कच्चे तेल के क्षेत्र में दुनिया का पहला 'स्विंग आयातक' बनकर चीन ने एक नई भूमिका निभाई है। उसने दिखा दिया है कि वह वैश्विक आपूर्ति में आने वाले झटकों को आसानी से झेल सकता है।
ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल के संघर्ष के दौरान चीन ने अपने तेल आयात में एक-तिहाई की कमी कर दी। यह 8 साल का सबसे निचला स्तर था, लेकिन फिर भी उसकी अर्थव्यवस्था पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। यहां तक कि पिछले साल के मुकाबले टैंकरों के जरिए होने वाले तेल आयात में 45 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, फिर भी वहां आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कारोबार बिना रुकावट चलता रहा।
तेल भंडार का लिया सहारा
इस कमी से निपटने के लिए चीन ने अपने 1.4 अरब बैरल के विशाल तेल भंडार का इस्तेमाल किया और साथ ही अपने देश के भीतर ही ऊर्जा के स्रोतों को भी बढ़ाया।
कोयले से बिजली का उत्पादन इस मौसम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) ने भी जबरदस्त रफ्तार पकड़ी।
राजमार्गों पर चार्जिंग पिछले साल के मुकाबले लगभग 80 फीसदी ज्यादा हुई। इन कदमों से चीन की मलक्का जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील रास्तों पर निर्भरता कम हुई है।
यह वैश्विक ऊर्जा बाजार के काम करने के तरीके में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है। अब देश केवल रुझानों के पीछे नहीं चल रहा, बल्कि खुद नए रुझान तय कर रहा है।