बजट में अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
क्या है खबर?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश कर दिया है। रिफॉर्म पर केंद्रित इस बजट की घोषणाओं में वैश्विक उथल-पुथल का असर भी देखा गया है। खासतौर पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के असर को कम करने के लिए बड़ी घोषणाएं हैं। श्रम प्रधान क्षेत्रों में ड्यूटी से जुड़े ऐलान, टेक्सटाइल सेक्टर के लिए रियायतें और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से जुड़ी घोषणाओं को टैरिफ से जोड़कर देखा जा रहा है।
SEZ
SEZ के लिए रियायतों का ऐलान
वित्त मंत्री ने SEZ में विनिर्माण इकाइयों द्वारा घरेलू शुल्क क्षेत्र (DTA) में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री की सुविधा के लिए विशेष एकमुश्त उपाय का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, "वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण SEZ में विनिर्माण इकाइयों द्वारा क्षमता के उपयोग के संबंध में उत्पन्न चिंताओं को दूर करने के लिए मैं विशेष एकमुश्त उपाय के रूप में पात्र विनिर्माण इकाइयों द्वारा DTA में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री की सुविधा देने का प्रस्ताव करती हूं।"
असर
क्या होगा इसका असर?
उद्योग जगत लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था, क्योंकि अमेरिका में ज्यादा टैरिफ के कारण SEZ इकाइयों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 5 सालों में 7 SEZ में 466 इकाईयां बंद हो गई हैं। फिलहाल देश में 370 SEZ हैं, जो करीब 31 लाख लोगों को रोजगार देते हैं। टैरिफ के कारण ये क्षेत्र संकट में है, क्योंकि ये पूरी तरह से अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं।
टेक्सटाइल
टेक्सटाइल क्षेत्र को लेकर भी ऐलान
वित्त मंत्री ने टेक्सटाइल क्षेत्र को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक इंटीग्रेटेड योजना की घोषणा की है। उन्होंने रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर और मैन-मेड फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना की घोषणा की है। मशीनों के लिए आर्थिक मदद और पारंपरिक क्लस्टर को आधुनिक बनाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, "मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करने और बुनकरों को मदद सुनिश्चित करने के लिए नेशनल हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।"
अहमियत
क्यों अहम है ये कदम?
टेक्सटाइल उद्योग औद्योगिक उत्पादन में 13, निर्यात में 12 और GDP में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है। अमेरिकी टैरिफ से ये सेक्टर खासा प्रभावित हुआ है। पिछले महीने अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने कहा था कि व्यापार समझौता न होने से स्थायी नुकसान हो सकता है और नौकरियां जा सकती हैं। AEPC ने कहा था, "टैरिफ से सेक्टर में गंभीर रुकावट आ रही है। अगर तुरंत समाधान नहीं हुआ, तो ऑर्डर रुकने और नौकरियां जा सकती हैं।"
कंटेनर
कंटेनर के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना
वित्त मंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर उत्पादन योजना की घोषणा की है। कंटेनरों की लगातार कमी और इनकी आपूर्ति के लिए भारत की चीन पर निर्भरता के बीच ये फैसला अहम है। इसका मकसद विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाना है। मध्य-पूर्व में हालिया तनाव के कारण इस क्षेत्र में भारत की निर्भरता उजागर हुई थी। हाल ही में असम और गुजरात के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के सामने ये मुद्दा उठाया था।
उद्योग
क्या कह रहा है उद्योग जगत?
उद्योग जगत ने थोड़ी निराशा जताई है। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के मध्य प्रदेश चैप्टर के पदाधिकारियों के ने कहा कि बजट से जिस तरह की छूट की उम्मीद की गई थी, वह नहीं है। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज मंडीदीप के उपाध्यक्ष आदित्य राज मोदी ने कहा, "अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद उम्मीद थी कि बजट में शॉट टर्म के लिए राहत मिलेगी, लेकिन इस दिशा में कोई प्रावधान नहीं किया गया है।"