अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ऊंचे बने हुए हैं कच्चे तेल के दाम
कच्चे तेल की कीमतें मंगलवार (2 जून) को 95 डॉलर (करीब 8,830 रुपये) प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। दरअसल, हाल ही में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं बढ़ी थीं, जो दुनियाभर में तेल के व्यापार के लिए एक बेहद अहम रास्ता है।
इन्हीं चिंताओं के चलते कीमतों में 4 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया था। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में बनी अनिश्चितता के चलते लोगों को डर है कि कहीं तेल की सप्लाई में रुकावट न आ जाए।
भारत को महंगाई दर 4.8 फीसदी पहुंचने का जोखिम
एक तरफ जहां तेल की बढ़ती कीमतें एयरलाइंस जैसे ईंधन पर निर्भर सेक्टर्स पर दबाव डाल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के शेयर बाजार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं।
भारत की बात करें तो विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर, कच्चा तेल महंगा ही रहा तो रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और देश के आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर, ऊंची कीमतें ऐसे ही जारी रहीं तो महंगाई 4.8 फीसदी तक पहुंच सकती है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर 6.3 फीसदी तक गिर सकती है। साथ ही अगर, ये तनाव लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं तो भारतीय रुपये पर भी बुरा असर पड़ सकता है।