क्यों इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में हो सकता है इजाफा?
भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माता मेमोरी कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। दरअसल, ये वे चिप्स और स्टोरेज हैं, जिनकी बदौलत नेविगेशन और स्मार्ट फीचर्स काम करते हैं। अल्ट्रावॉयलेट के सह संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) नीरज राजमोहन ने बताया कि कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे निर्माताओं के लिए काम मुश्किल हो गया है।
इलेक्ट्रिक बाइक बनाने वाली राप्ती के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दिनेश अर्जुन ने भी कहा कि इन कंपोनेंट्स की लागत करीब 5 फीसदी बढ़ गई है।
स्मार्टफोन और AI की मांग से मेमोरी चिप्स की कमी
इसका एक बड़ा कारण यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्टफोन कंपनियां भारी मात्रा में मेमोरी पार्ट्स खरीद रही हैं। इससे EV निर्माताओं के लिए बहुत कम चिप्स बच रहे हैं।
माइक्रोन जैसी कंपनियां अब अपना ध्यान डाटा सेंटर्स को सप्लाई करने पर लगा रही हैं, जिससे बाजार पर और दबाव बढ़ रहा है।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी रेयर-अर्थ मैग्नेट्स और लिथियम-आयन बैटरियों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।
एथर एनर्जी के CEO तरुण मेहता का कहना है कि इन सभी दबावों की वजह से जल्द ही इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं।