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#NewsBytesExplainer: अमेरिका ने वेनेजुएला पर क्यों किया हमला? दोनों देशों के बीच विवाद की पूरी कहानी
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच का पूरा विवाद समझते हैं

#NewsBytesExplainer: अमेरिका ने वेनेजुएला पर क्यों किया हमला? दोनों देशों के बीच विवाद की पूरी कहानी

लेखन आबिद खान
Jan 03, 2026
05:37 pm

क्या है खबर?

साल की शुरुआत में ही दुनिया में युद्ध का नया मोर्चा खुल गया है। अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर दिया है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस समेत 4 शहरों पर मिसाइलें दागी हैं और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया है। मादुरो को उनकी पत्नी के साथ अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है। आइए दोनों देशों के बीच का पूरा विवाद समझते हैं।

शुरुआत

विवाद समझने से पहले थोड़ा इतिहास जानिए

विवाद की जड़ तक पहुंचने के लिए हमें थोड़ा इतिहास में झांका पड़ेगा। दरअसल, वेनेजुएला में भारी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैसों का भंडार है। यही वजह है कि इन संसाधनों पर हमेशा से दूसरे देशों की नजर रही है। 1922 में तेल का पता चलने के बाद डच से लेकर अमेरिका तक कई देशों ने यहां तेल खनन शुरू किया। इसके लिए इन देशों ने मशीनरी लगाई और भारी-भरकम निवेश भी किया।

राष्ट्रीयकरण

1976 में तेल उद्योग का हुआ राष्ट्रीयकरण

1976 में तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज ने पूरे तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसके बाद सभी विदेशी तेल कंपनियों का सारा कामकाज और संपत्तियां वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA के पास चली गई। इनमें ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की थी। कंपनियों को मुआवजा मिला, लेकिन वे नाराज थीं। उनका कहना था कि उन्होंने वेनेजुएला में तेल उद्योग विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। अमेरिका आज भी इन संपत्तियों को अपना बताता है।

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शावेज

लगातार तनावपूर्ण बने रहे अमेरिका-वेनेजुएला के संबंध

1998 में ह्यूगो शावेज राष्ट्रपति बने। उन्होंने क्यूबा, रूस और चीन के साथ मजबूत संबंध बनाए और देश में गरीबी कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए। हालांकि, इस दौरान वेनेजुएला की तेल पर निर्भरता बढ़ती गई और सरकारी तेल कंपनी PDVSA में भ्रष्टाचार बढ़ा। इस दौरान अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते तल्ख बने रहे। साल 2000 में शावेज के तख्तापलट की एक नाकाम कोशिश हुई। शावेज ने अमेरिका पर विद्रोहियों को समर्थन देने का आरोप लगाया।

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मादुरो का कार्यकाल

मादुरो के कार्यकाल में भी जारी रहा आर्थिक और राजनीतिक संकट

मादुरो के कार्यकाल में भी वेनेजुएला में उथल-पुथल जारी रही। उनकी सरकार ने मुद्रा छापकर आर्थिक संकट से निपटने की कोशिश की, लेकिन इससे हालात और बिगड़ गए। 2019 में देश को भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। इस दौरान लाखों लोग देश छोड़कर भाग गए और राजनीतिक संकट भी जारी रहा। मादुरो के चुनावों को अवैध घोषित कर दिया गया और अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को अंतरिम राष्ट्रपति की मान्यता दे दी।

तात्कालिक कारण

हालिया समय में कैसे बढ़ा वेनेजुएला-अमेरिका में तनाव?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में वेनेजुएला पर अधिकतम दबाव की रणनीति अपनाई। उन्होंने मादुरो को ड्रग तस्कर घोषित कर दिया। इस दौरान अमेरिका ने 20 से ज्यादा नावों को निशाना बनाया, जो कथित तौर पर ड्रग्स की तस्करी कर रहे थे। पिछले साल नवंबर में वेनेजुएला के तट से केवल 40 किलोमीटर दूर त्रिनिदाद और टोबैगो में अमेरिका ने युद्धपोत तैनात कर दिया। फिलहाल अमेरिका ने 3 युद्धपोत वेनेजुएला के पास तैनात कर रखे हैं।

अमेरिका

क्या अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है?

मादुरो का कहना है कि ट्रंप केवल संसाधनों पर कब्जा करने के लिए साजिश रच रहे हैं। दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात तेल भंडार है, जो सऊदी अरब से भी ज्यादा है। इतने बड़े तेल संसाधन पर कब्जा वैश्विक ऊर्जा उद्योग पर बड़ा असर डाल सकता है और अमेरिका की पश्चिमी एशियाई तेल पर निर्भरता कम कर सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और टैरिफ से उपजे हालात के बीच इसकी अहमियत और बढ़ जाती है।

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