
मंकीपॉक्स का नाम बदलने और उसे वैश्विक आपातकाल घोषित करने पर क्यों विचार कर रहा WHO?
क्या है खबर?
दुनिया के 39 से अधिक देशों में पैर पसार चुके मंकीपॉक्स वायरस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित दुनियाभर के चिकित्सा विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है।
इस बीच कुछ विशेषज्ञों ने इसकी गंभीरता को देखते हुए इसका बिना भेदभाव और बिना स्टिग्मा वाला नाम रखने की मांग की है।
इसको लेकर WHO ने इसका नाम बदलने पर विचार शुरू कर दिया है और इस बीमारी को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के लिए आपातकालीन समिति का गठन किया है।
बयान
मंकीपॉक्स का नाम बदलने पर कर रहे हैं काम- गेब्रिएसेस
WHO प्रमुख डॉ टेड्रोस अधेनोम गेब्रिएसेस ने कहा, "WHO दुनिया भर के भागीदारों और विशेषज्ञों के साथ मंकीपॉक्स वायरस का नाम बदलने, इससे संक्रमितों के समूह और इससे होने वाली बीमारी की गंभीरता के अध्ययन भी काम कर रहा है। हम जल्द से जल्द नए नामों के संबंध में घोषणा करेंगे।"
उन्होंने कहा, "हमने मंकीपॉक्स के प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल मानने पर विचार के लिए एक आपातकालीन समिति का भी गठन किया है।"
सवाल
WHO क्यों बदल रहा है मंकीपॉक्स का नाम?
WHO ने मंकीपॉक्स का नाम बदलने का निर्णय अफ्रीका और दुनिया के 30 वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा इसका नाम बदलने की सिफारिश के आधार पर किया है।
वैज्ञानिकों ने WHO को लिखे पत्र में कहा कि नए वैश्विक प्रकोप की उत्पत्ति अभी भी अज्ञात है और इस बात के प्रमाण अधिक हैं कि अफ्रीका महाद्वीप के बाहर इस वायरस का प्रसार लंबे समय से चल रहा है। ऐसे में इसका नाम बिना भेदभाव और बिना स्टिग्मा वाला होना चाहिए।
जानकारी
वैज्ञानिकों के समूह ने WHO को भेजी तस्वीरें
वैज्ञानिकों ने पत्र के साथ चेचक के घावों को चित्रित करने के लिए अफ्रीकी रोगियों की तस्वीरें भी भेजी है और कहा है कि वर्तमान वैश्विक प्रकोप को जानबूझकर अफ्रीका, पश्चिम अफ्रीका या नाइजीरिया से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मांग
क्या है वैज्ञानिकों की मांग?
वैज्ञानिकों ने पश्चिमी अफ्रीका, मध्य अफ्रीका और वैश्विक उत्तरी देशों में फैलते मंकीपॉक्स संक्रमण को लेकर इंसानों और जानवरों दोनों के वायरल जीनोम को शामिल करते हुए नए नाम देने का प्रस्ताव रखा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल उत्तरी गोलार्ध ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मंकीपॉक्स महामारी को रोकने की जरूरत है। इसका नया नाम बीमारी को लेकर विशेष क्षेत्र के लिए पैदा हो रही गलतफहमी, भेदभाव और बदनामी को दूर करने का काम करेगा।
हालात
वर्तमान में क्या है मंकीपॉक्स संक्रमण की स्थिति?
WHO के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस अब बड़ी तेजी से दुनिया में अपने पैर पसार रहा है। अब तक दुनिया के 39 देशों में इसके 1,600 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। इसी तरह 1,500 संदिग्ध मामलों पर नजर रखी जा रही है।
यदि WHO इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करता है तो इसे कोरोना महामारी के समान पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा माना जाएगा और इसके उपचार के लिए विशेष प्रयास और योजनाएं तैयार की जाएगी।
पृष्ठभूमि
क्या है मंकीपॉक्स वायरस?
मंकीपॉक्स एक जूनोटिक (एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में फैलने वाली) बीमारी है। ये बीमारी मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमण के कारण होती है जो पॉक्सविरिडाइ फैमिली के ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से आता है।
ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस में चेचक (स्मालपॉक्स) और काउपॉक्स बीमारी फैलाने वाले वायरस भी आते हैं।
साल 1958 में रिसर्च के लिए तैयार की गईं बंदरों की बस्तियों में यह वायरस सामने आया था और इससे पॉक्स जैसी बीमारी होना पाया गया था।
प्रसार और लक्षण
कैसे फैलता है मंकीपॉक्स वायरस और क्या हैं इसके लक्षण?
मंकीपॉक्स से संक्रमित किसी जानवर या इंसान के संपर्क में आने पर कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।
ये वायरस टूटी त्वचा, सांस और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। छींक या खांसी के दौरान निकलने वाली बड़ी श्वसन बूंदों से इसका प्रसार होता है।
इंसानों में मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक जैसे होते हैं। शुरूआत में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और पीठ में दर्द, थकावट होती है और तीन दिन में शरीर पर दाने निकलने लग जाते हैं।