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#NewsBytesExplainer: ईरान ने 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर किया हमला, क्यों है चिंता की बात?
ईरान ने डिएगो गार्सिया द्वीप पर मिसाइलें दागी हैं

#NewsBytesExplainer: ईरान ने 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर किया हमला, क्यों है चिंता की बात?

लेखन आबिद खान
Mar 22, 2026
02:46 pm

क्या है खबर?

ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर मिसाइलें दागी हैं। यहां ब्रिटेन और अमेरिका का एक रणनीतिक सैन्य अड्डा है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर हमले करने के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। हालांकि, ईरान की दोनों मिसाइलें बेस तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन इन्होंने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

द्वीप

सबसे पहले डिएगो गार्सिया के बारे में जानिए

डिएगो गार्सिया चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है, जो भारत के दक्षिणी छोर के पास हिंद महासागर के मध्य में स्थित 60 से ज्यादा द्वीपों की श्रृंखला है। ये द्वीप 1814 से ब्रिटिश नियंत्रण में हैं। 1960 और 1970 के दशक में ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया से लगभग 2,000 लोगों को बेदखल कर दिया, ताकि अमेरिकी सेना वहां अपना अड्डा बना सके। भारत से डिएगो गार्सिया की दूरी करीब 1,800 किलोमीटर है।

अहमियत

कितना अहम है डिएगो गार्सिया?

अमेरिका और ब्रिटेन के लिए डिएगो गार्सिया पूरे एशिया और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य रणनीति का मजबूत केंद्र है। यहां अमेरिका के बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और गाइडेड मिसाइल जहाज तैनात हैं। इसके अलावा यहां विशाल ईंधन भंडारण, रडार सिस्टम और कंट्रोल टावर भी हैं, जो लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को संभव बनाते हैं। अमेरिका इसका इस्तेमाल वियतनाम से लेकर इराक और अफगानिस्तान युद्ध में कर चुका है।

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हमला

द्वीप पर ईरानी हमले के बारे में क्या पता है?

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सबसे पहले अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से डिएगो गार्सिया पर हमले की जानकारी दी। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान ने 2 मिसाइलें दागी थीं, जिनमें से एक उड़ान के दौरान विफल हो गई। सूत्रों के अनुसार, दूसरी मिसाइल को अमेरिकी युद्धपोत से दागी गई SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल ने निशाना बनाया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइल को रोका जा सका या नहीं।

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चिंता

हमले से क्यों बढ़ी पश्चिमी देशों की चिंताएं?

डिएगो गार्सिया ईरान से 4,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ईरान ने इतनी दूर हमला कर सबको चौंका दिया है, क्योंकि अब तक माना जाता रहा है कि ईरान के पास मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर तक है। ईरान ने पहले अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में मिसाइलों की मारक क्षमता खुद 2,000 किलोमीटर निर्धारित की थी। इस हमले से आशंकाएं बढ़ी हैं कि ईरान के पास लंबी दूरी की मिसाइलें भी हैं।

रेंज

कितनी है ईरान की मिसाइलों की रेंज?

अलग-अलग सैन्य संस्थानों और स्वतंत्र विश्लेषकों का अनुमान है कि ईरान के 4,000 किलोमीटर रेंज तक की मिसाइलें हैं। इजरायल के अल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर ने ईरानी मिसाइलों के लगभग 3,000 किलोमीटर रेंज का अनुमान लगाया है। ईरान की खोर्रमशहर मिसाइल की रेंज 2,000 से 3,000 किलोमीटर है। इसके बाद इमाद मिसाइलों की रेंज 1,800 किलोमीटर, कद्र की रेंज 1,600- 2,000 किलोमीटर मानी जाती है। वहीं, शहाब-3 की रेंज 1,300 किलोमीटर और रिजवान की रेंज 1,400 किलोमीटर है।

भारत

भारत के लिए क्या है परेशानी की बात?

BBC से बात करते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रेमानंद मिश्रा ने कहा, "डिएगो गार्सिया पर अगर ईरान का हमला हुआ है, भले ही मिसाइल लक्ष्य न भेद पाई हों, तो वह भविष्य के लिए खतरा है। भारत की जो हिंद-प्रशांत रणनीति है, उसके लिए यह चिंता की बात है। यह इस समुद्री क्षेत्र में जहाजों के स्वतंत्र आवागमन के साथ ही भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता, खासकर मैरीटाइम सिक्योरिटी की नीति पर सवालिया निशान है।"

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