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#NewsBytesExplainer: डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर क्यों लगी रोक और आगे क्या होगा?
कोलोराडो की कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है

#NewsBytesExplainer: डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर क्यों लगी रोक और आगे क्या होगा?

लेखन आबिद खान
Dec 20, 2023
11:20 am

क्या है खबर?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। कोलोराडो की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। बता दें कि ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार हैं। ये मामला जनवरी, 2021 में हुई कैपिटल हिल हिंसा से जुड़ा हुआ है। आइए समझते हैं पूरा विवाद क्या है और अब ट्रंप के पास आगे क्या विकल्प हैं।

मामला

क्या है मामला?

दरअसल, 2020 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन ने ट्रंप को हराया था। ट्रंप ने चुनावों में धांधली होने की आशंका जताई थी और नतीजों को मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ट्रंप के समर्थक कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद सदनों के भवन) में घुस गए थे और जमकर उत्पात मचाया था। इसी मामले में ट्रंप के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे।

फैसला

कोलोराडो कोर्ट ने किस मामले में सुनाया फैसला?

इसी साल सितंबर में मतदाताओं के एक समूह ने ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था। समूह का कहना था कि ट्रंप ने कैपिटल हिल दंगों के लिए अपने समर्थकों को भड़काया, इसलिए उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए मतदान से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। इसी मामले में कोर्ट ने ट्रंप को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया है। हालांकि, कोर्ट ने इस फैसले को लागू करने पर 4 जनवरी तक के लिए रोक लगा दी है।

अपराध

किस अपराध के तहत दोषी पाए गए ट्रंप?

कोर्ट ने अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की धारा 3 का इस्तेमाल कर ट्रंप के खिलाफ 4-3 से फैसला सुनाया है। इस धारा के तहत उन लोगों की राज्य या संघीय कार्यालयों में पहुंच को रोकना है, जिन्होंने संविधान का समर्थन करने की शपथ ली है, लेकिन विद्रोह में भी शामिल रहे हैं। अमेरिका के इतिहास में ये पहली बार है, जब किसी व्यक्ति को इस धारा के जरिए राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोका गया है।

कोर्ट

फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा, "हमारा बहुमत से मानना है कि ट्रंप संविधान के 14वें संशोधन की धारा 3 के तहत राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य हैं। हम कानून को लागू करने के अपने गंभीर कर्तव्य के प्रति सचेत हैं। बिना किसी डर, पक्षपात और जनता की प्रतिक्रिया से प्रभावित हुए बिना हम ऐसा फैसला दे रहे हैं, जो कानूनसंगत है। हम हमारे सामने जो सवाल हैं, उनके परिणाम और ये कितना बड़ा होने वाला है, इन सब बातों से परिचित हैं।"

असर

फैसले का क्या होगा असर?

ये फैसला अमेरिका के राज्य कोलोराडो की सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है, इसलिए ये केवल कोलोराडो राज्य में ही लागू होगा। अमेरिका के अन्य राज्यों में भी ट्रंप के खिलाफ इसी तरह के मुकदमे दायर किए गए थे, जो खारिज हो चुके हैं। इस मामले में भी निचली अदालत ने ट्रंप को कैपिटल हिल दंगों का दोषी तो पाया था, लेकिन चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई थी। इस वजह से फैसले का व्यापक असर होने के आसार कम हैं।

विकल्प

अब ट्रंप के पास आगे क्या विकल्प हैं?

ट्रंप इस फैसले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। ट्रंप की कानूनी टीम ने ऐसा करने की बात कही भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को राहत मिल जाएगी। CNN के कानूनी विश्लेषक एली होनिग ने कहा, "अतीत में ऐसे दर्जनों मुकदमे दायर किए गए थे। उनमें से 18 या तो खारिज कर दिए गए या वादी द्वारा वापस ले लिए गए।"

ट्रंप

फैसले पर ट्रंप का क्या कहना है?

ट्रंप ने कोर्ट के फैसले को अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित और बाइडन द्वारा समर्थित चुनाव में हस्तक्षेप की एक कुटिल योजना करार दिया। उन्होंने कहा, "यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि बाइडन और धुर वामपंथी समूह हमें किसी भी तरह से चुनाव में रोकने के लिए बेताब हैं। बाइडन लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा हैं। वह राष्ट्रपति चुनाव में कानून प्रवर्तन को हथियार बना रहे हैं क्योंकि वह बुरी तरह हार रहे हैं।"