क्या है इजरायल की 'ब्लू स्पैरो' मिसाइल, जिससे हुई ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत?
क्या है खबर?
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में गत 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इजरायल और अमेरिका के लिए यह अभियान आसान नहीं था। इसमें महीनों की योजना, खामेनेई के ठिकाने की ट्रैकिंग और आखिर में एक सटीक हमला शामिल थी। रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई की मौत इजरायल की सबसे शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल 'ब्लू स्पैरो' के हमले से हुई थी। ऐसे में आइए इस मिसाइल के बारे में जानते हैं।
मिसाइल
क्या है 'ब्लू स्पैरो' मिसाइल?
रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई की मौत इजरायल की 'ब्लू स्पैरो' मिसाइल से हुई, जिसने तेहरान की पाश्चर स्ट्रीट स्थित सर्वोच्च नेता के परिसर को निशाना बनाया था। इजरायल द्वारा विकसित ब्लू स्पैरो मिसाइल का डिजाइन और उत्पादन राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और अन्य साझेदारों द्वारा किया जाता है। यह इजरायल के 'स्पैरो' मिसाइल परिवार का हिस्सा है। इसके अलावा 'ब्लैक स्पैरो' और 'सिल्वर स्पैरो' मिसाइलें सोवियत संघ द्वारा निर्मित स्कड मिसाइलों का खतरा कम करती हैं।
खासियत
क्या है 'ब्लू स्पैरो' मिसाइल की खासियत?
ब्लू स्पैरो मिसाइल की लंबाई 6.5 मीटर और वजन लगभग 1.9 टन है। इसे आमतौर पर इजरायली F-15 लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जाता है। विमान के बूस्टर रॉकेट मिसाइल को ऊंचाई तक पहुंचाते हैं, जिसके बाद यह लक्ष्य की ओर बढ़ती है। यह 1,240 मील दूर के लक्ष्यों को भेद सकती है। यह पृथ्वी के वायुमंडल को पार कर जाती है, जिससे यह अत्यधिक सुरक्षित लक्ष्यों पर हमले के लिए एक आदर्श विकल्प बन जाती है।
ताकत
मिसाइल को रोकना होता है लगभग असंभव
इस मिसाइल की पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर निकलने और फिर से प्रवेश करने की क्षमता के कारण दुश्मन का इसे रोकना असंभव होता है। यह हथियार ईरान की रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लू स्पैरो मिसाइल अर्ध-बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करती है, इसलिए पायलट उड़ान पथ को समायोजित कर सकते हैं। ईरान में मिले मलबे के आधार पर माना जा रहा है कि इजरायल ने ईरान पर हमले में इसी का इस्तेमाल किया था।
हमला
इजरायल और अमेरिका ने खामेनेई पर कैसे किया हमला?
खामेनेई की हत्या एक बेहद जटिल ऑपरेशन था। यह हत्या ईरान के सर्वोच्च नेता की वर्षों से चल रही जासूसी और निगरानी के बाद हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल की 8200 यूनिट ने उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी, यहां तक कि ट्रैफिक कैमरों का इस्तेमाल करके भी उनका पता लगाया। उस खुफिया जानकारी के आधार पर अमेरिका और इजरायल ने खामेनेई के परिसर पर वास्तविक खाका तैयार कर हमला करने की योजना बनाई थी।
बंकर
खामेनेई ने बेहद सुरक्षित बंकर में ली थी पनाह
86 वर्षीय खामेनेई जमीन के नीचे बने एक बेहद सुरक्षित बंकर में छिपे थे। यह बंकर इतनी गहराई पर था कि वहां तक लिफ्ट से पहुंचने में भी लगभग 5 मिनट लगते थे। ईरानी अधिकारियों के रात के अंधेरे में हमला होने के शक के विपरीत अमेरिका और इजरायल ने शनिवार सुबह खामेनेई के परिसर पर हमला किया। इजरायल ने उसके परिसर के आसपास की फोन सेवा भी बाधित कर दी। इससे खामेनेई अतिरिक्त सहायता भी नहीं बुला पाए।
हमला
कैसे हुई मौजूद संघर्ष की शुरुआत?
दरअसल, इजरायल ने गत 28 फरवरी को अमेरिका की सेना के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था। उसने राजधानी तेहरान के अलावा करमानशाह, लोरेस्टन, तबरीज, इस्फहान और करज शहरों 30 से अधिक जगहों पर हमले किए थे। तेहरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें खामेनेई समेत उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहू की भी मौत हो गई। उसके बाद ईरान के जवाबी कार्रवाई शुरू करते ही संघर्ष भड़क गया।