AI से नौकरियों पर असर का पहले ही मिलेगा संकेत, एंथ्रोपिक बना रही यह खास सिस्टम
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से कई क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रहा है। इससे काम आसान हो रहे हैं, लेकिन नौकरियों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। इसी को देखते हुए AI कंपनी एंथ्रोपिक ने व्हाइट-कॉलर नौकरियों में होने वाले बदलाव को समझने के लिए एक नया अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम बनाने की योजना बनाई है। कंपनी का कहना है कि इसका मकसद समय रहते यह पहचानना है कि AI का रोजगार पर क्या असर पड़ सकता है।
काम
यह सिस्टम कैसे करेगा काम?
एंथ्रोपिक के मुताबिक, यह सिस्टम अलग-अलग नौकरियों के कामों का विश्लेषण करेगा। इसमें यह देखा जाएगा कि किसी नौकरी में कौन-कौन से काम होते हैं और उनमें से कितने काम बड़े लैंग्वेज मॉडल यानी AI आसानी से कर सकते हैं। कंपनी अपने डाटा के आधार पर यह भी ट्रैक करेगी कि वास्तविक दुनिया में कौन से काम पहले से ऑटोमेट हो रहे हैं। इन जानकारियों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि कौन-कौन से पेशे ज्यादा जोखिम में हैं।
फायदा
इसका क्या हो सकता है फायदा?
इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भविष्य में रोजगार से जुड़े बदलावों को जल्दी समझा जा सकेगा। इससे अर्थशास्त्रियों और नीति बनाने वालों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि AI किन क्षेत्रों में ज्यादा असर डाल रहा है। अगर किसी सेक्टर में नौकरियों पर दबाव बढ़ता है, तो समय रहते प्रशिक्षण, नई स्किल और रोजगार नीति जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इससे आर्थिक बदलावों को संभालना थोड़ा आसान हो सकता है।
अन्य बातें
रिसर्च में सामने आईं कुछ अहम बातें
एंथ्रोपिक की शुरुआती रिसर्च में पाया गया कि कंप्यूटर प्रोग्रामर, कस्टमर सर्विस, डाटा एंट्री और मेडिकल रिकॉर्ड से जुड़े काम AI से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। वहीं कुक, लाइफगार्ड और डिशवॉशर जैसे काम अभी AI से कम प्रभावित माने जा रहे हैं। हालांकि, फिलहाल बड़े स्तर पर बेरोजगारी के ठोस संकेत नहीं मिले हैं। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI के असर को ध्यान से ट्रैक करना जरूरी होगा।