#NewsBytesExplainer: पाकिस्तान की अब कतर, इंडोनेशिया और तुर्की के साथ सैन्य साझेदारी, क्या है बद्र समझौता?
क्या है खबर?
सऊदी अरब और तुर्की के साथ मक्का समझौता करने के बाद पाकिस्तान ने एक और नया रक्षा समझौता किया है। इसमें तुर्की, कतर और इंडोनेशिया शामिल हैं। चारों देशों ने कतर की राजधानी दोहा में ये रक्षा समझौता किया है, जिसे 'बद्र समझौता' नाम दिया गया है। इसके तहत हथियारों का उत्पादन, सैन्य तकनीक का लेनदेन और प्रशिक्षण की जाएगी। आइए इस समझौते के बारे में समझते हैं।
समझौता
सबसे पहले समझौते के बारे में जानिए
दोहा में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर, कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान, और इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते का नाम बद्र रखा गया है, जो सऊदी अरब में शुरुआती मुसलमानों और मक्का के कबीलों के बीच हुई पहली बड़ी सैन्य लड़ाई की जगह है।
प्रावधान
समझौते में क्या-क्या शामिल है?
कतर ने बताया कि समझौते का उद्देश्य रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना, देशों के बीच रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना और तकनीकी रक्षा प्रशिक्षण के साथ-साथ अनुसंधान और विकास क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
इसके तहत चारों देश अपने संसाधनों, तकनीक, और निवेश का इस्तेमाल एक-दूसरे की मदद के लिए करेंगे।
तुर्की के रक्षा उद्योग प्रेसीडेंसी के अध्यक्ष हलुक गोरगुन ने कहा कि ये संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी विकास के लिए 'रणनीतिक सहयोग' की नींव है।
ताकत
समझौते में शामिल हर देश की क्या है ताकत?
विशेषज्ञों के मुताबिक, तुर्की NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है और उसका रक्षा उद्योग काफी मजबूत है। उसके पास हथियार बनाने की आधुनिक तकनीक और सैन्य प्रणाली तैयार करने का अनुभव है।
कतर के पास निवेश के लिए पैसा और हथियार खरीदने की क्षमता है।
वहीं, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के पास संयुक्त विकास और घरेलू उत्पादन का अनुभव है। पाकिस्तान विनिर्माण क्षमता, कुशल कार्यबल और एक बड़ा घरेलू बाजार प्रदान करता है।
तरीका
कैसे लागू होगा समझौता?
मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चारों देश अपने-अपने राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के भीतर अपनी-अपनी जरूरतों की पहचान करेंगे।
इसके बाद एक 'कार्यकारी बोर्ड' संयुक्त उत्पादन के लिए योजनाएं तैयार करेगा।
फिर इन योजनाओं को एक 'रणनीतिक बोर्ड' को भेजा जाएगा, जो बजट और उत्पादन स्थानों पर फैसला लेगा।
माना जा रहा है कि तुर्की में संयुक्त उत्पादन सुविधाएं स्थापित की जाएंगी, जिसके पास इस क्षेत्र की सबसे व्यापक रक्षा उद्योग अवसंरचना है।
वजह
चारों देशों ने अभी क्यों किया समझौता?
ये समझौता ऐसे वक्त हुआ है, जब ईरान युद्ध 8वें महीने में प्रवेश कर चुका है। साथ ही सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
समझौते की एक बड़ी वजह हथियारों और सैन्य तकनीक के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करना भी है, क्योंकि खबरें हैं कि ईरान युद्ध के बीच अमेरिका हथियारों की बड़ी कमी से जूझ रहा है।
भारत
समझौते पर भारत की क्यों नजर?
जानकारों का कहना है कि इस समझौते से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के अवसर मिलते हैं।
फिलहाल पाकिस्तान अपने हथियारों के लिए चीन पर निर्भर है, लेकिन इस समझौते के बाद वो हथियारों और सैन्य प्रौद्योगिकी के स्रोतों में विविधता लाने में सक्षम होगा।
यानी ये पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और घरेलू रक्षा उद्योग के विकास में सहायक हो सकता है।