क्या अयातुल्ला खामेनेई भारत के मित्र थे और क्या सरकार ने खुद बनाई थी उनसे दूरी?
क्या है खबर?
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत सरकार की चुप्पी की आलोचना करते हुए इसे भारत की विरासत का परित्याग बताया है। हालांकि, खामेनेई का भी भारत के प्रति रवैया पूरी तरह से मित्रवत नहीं था। उन्होंने कई मौकों पर भारत विरोधी रुख अपनाया था। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या वाकई खामेनेई भारत के मित्र थे और उनका रवैया किस प्रकार रहा था।
आह्वान
कश्मीर के प्रताड़ित मुसलमानों के प्रति समर्थने जुटाने का आह्वान
खामेनेई ने साल 2017 में मुस्लिम समुदाय से कश्मीर के प्रताड़ित मुसलमानों के लिए समर्थन जुटाने का आह्वान किया था। उनकी बयानबाजी पाकिस्तानी दुष्प्रचार की तरह थी। उस समय तक भारत ने कश्मीर पर अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया था। अगस्त 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से भारत से कश्मीर पर न्यायपूर्ण नीति अपनाने की मांग की। इस पर विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को तलब किया था।
निंदा
खामेनेई ने की थी CAA की निंदा
जनवरी 2020 में खामेनेई ने भारत के नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) की निंदा करते हुए इसे मुस्लिम विरोधी भेदभाव बताया था। भारत ने उनकी टिप्पणी को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया था। इसी तरह मार्च 2020 में दिल्ली में हुए दंगों पर खामेनेई ने एक्स पर लिखा था, 'भारत को चरमपंथी हिंदुओं का सामना करना चाहिए।' उन्होंने दंगों को मुसलमानों का नरसंहार बताया था और भारत को इस्लाम जगत से अलग-थलग करने की धमकी तक दी थी।
प्रयास
खामेनेई ने किया था मुस्लिमों को भड़काने का प्रयास
दिल्ली दंगों को लेकर की गई पोस्ट में खामेनेई ने #IndianMuslimsInDanger हैशटैग का भी इस्तेमाल करते हुए मुस्लिमों को भड़काने का प्रयास किया था। विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को तलब किया था। बता दें कि दिल्ली दंगों में हिंदुओं को भी निशाना बनाया गया था, लेकिन खामेनेई ने उनका कोई जिक्र नहीं किया था। उन्होंने घटनाओं का एक चुनिंदा संस्करण प्रस्तुत किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के खिलाफ मुस्लिम भावनाओं को भड़काना था।
तुलना
खामेनेई ने म्यांमार और गाजा से की थी भारत की तुलना
सितंबर 2024 में खामेनेई ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में भारत की तुलना म्यांमार और गाजा से की थी। उस पोस्ट को 27 लाख लोगों ने देखा था। विदेश मंत्रालय ने पोस्ट को गलत जानकारी और अस्वीकार्य बताया था। ईरान अब इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में शामिल है, जिनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य मुस्लिम देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले करना शामिल है। ये देश भारत के सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में से हैं।
खिलाफत
UPA सरकार ने भी किया था ईरान के खिलाफ मतदान
सोनिया ने भले ही भारत की चुप्पी की निंदा की है, लेकिन 2004 से 2014 के बीच UPA सरकार ने भी भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते की वार्ता के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में तीन बार (2005, 2006 और 2009) ईरान के खिलाफ मतदान किया था। बाद में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ये मतदान दबाव में कराए गए थे। साल 2005 में तो ईरान को सुरक्षा समझौते का उल्लंघन करने वाला पाया गया था।
परहेज
NDA ने किया था मतदान से परहेज
UPA सरकार ने भले ही IAEA में तीन बार ईरान के खिलाफ मतदान कर उसे झटका दिया हो, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने साल 2022 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मतदान से परहेज किया था। 2017 और 2024 के बीच खामेनेई ने बार-बार भारत के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी की, जिसके जवाब में भारत ने हर बार ईरानी राजदूतों को तलब किया और उनकी टिप्पणियों को अपने घरेलू मामलों में हस्तक्षेप बताकर खारिज कर दिया।
जानकारी
खामेनेई के भारत के प्रति रवैये का क्या निकलता है निष्कर्ष?
सोनिया ने नैतिकता को अपने तर्क का आधार बनाया है, लेकिन खामेनेई के भारत से जुड़े इन उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि उनका भारत विरोधी रुख नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि उनकी इस्लामी विचारधारा से उपजा था।