ईरान पर प्रतिबंधों का कसता शिकंजा: दवाओं की किल्लत से मरीज बेहाल
ईरान को जरूरी दवाओं की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दवाइयों का कच्चा माल आयात करना मुश्किल हो गया है। भले ही ईरान अपनी ज्यादातर दवाइयां खुद बनाता है, लेकिन फिर भी वह बाहर से आने वाले सामान पर निर्भर है। बंदरगाहों पर रोक लगने और उड़ानों की संख्या कम होने के कारण, तेहरान अब अपनी रणनीतिक दवा भंडारों का इस्तेमाल कर रहा है और आपूर्ति बनाए रखने के लिए जमीनी रास्ते तलाश रहा है।
ईरानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन: 60 दवाइयां हुई कम
ईरानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक, करीब 60 ऐसी जरूरी दवाइयां हैं जिनकी कमी हो गई है। इनमें थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। यहां तक कि साधारण दर्द निवारक दवाइयां भी ढूंढना मुश्किल हो गया है। तकनीकी रूप से देखा जाए तो दवाइयों पर प्रतिबंध नहीं लगे हैं, लेकिन बैंकिंग संबंधी समस्याओं और सामान पहुंचने में देरी की वजह से इनकी कीमतें आसमान छू गई हैं। कुछ दवाइयों की कीमत तो 500 प्रतिशत तक बढ़ गई है। ईरान ने हाल ही में चीन से फ्लू वैक्सीन मंगवाई थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय बाधाओं के कारण जरूरतमंद मरीजों को अभी भी परेशानी हो रही है।