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ईरान ने मार गिराया था अमेरिकी विमान, अब जिंदा बचे सैनिक ने बताई आपबीती
ईरान से बचाए गए अमेरिकी पायलट ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपना अनुभव साझा किया है

ईरान ने मार गिराया था अमेरिकी विमान, अब जिंदा बचे सैनिक ने बताई आपबीती

लेखन आबिद खान
Sep 14, 2026
02:40 pm

क्या है खबर?

इसी साल अप्रैल में ईरान ने अमेरिका के F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया था। इसके बाद विमान में सवार दोनों पायलटों को दुश्मन की धरती पर उतरना पड़ा था। इनमें से एक पायलट को कुछ ही घंटे बाद बचा लिया गया था, जबकि दूसरे को बचाने का अभियान करीब 50 घंटे चला था। अब इस पायलट ने दुश्मन की धरती पर अपने भयावह अनुभव के बारे में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बात की है।

घटना

सबसे पहले घटना के बारे में जानिए

यह घटना 3 अप्रैल की है, जब ईरान ने कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से अमेरिका के F-15E विमान को मार गिराया था। ये विमान ईरान के कोहगिलुयेह और बोयेर-अहमद प्रांत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, उस रात उनका मिशन इस्फहान के दक्षिण में एक पहाड़ी क्षेत्र के पास स्थित उद्योगों को निशाना बनाना था। माना जाता था कि यहां ईरान अपनी संवर्धित परमाणु सामग्री को रखता है।

पायलट

पायलट बोले- 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे गिरा

CBS को दिए साक्षात्कार में पायलट ने अपनी जीवित रहने की कहानी को 'आधुनिक युग का चमत्कार' बताया।

उन्होंने कहा कि दूसरे पायलट ने विमान को बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन उन्हें एहसास हो गया कि अब इसे बचाया नहीं जा सकता, इसलिए दोनों ने इजेक्ट कर दिया।

उन्होंने कहा, "शुरुआती हमले में मेरा पैराशूट क्षतिग्रस्त हो गया था। मैं 70 से 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे गिर रहा था।

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हड्डियां

पीठ, हाथ और कंधे की हड्डियां टूटीं

पायलट ने बताया कि जमीन पर गिरने के बाद उसकी पीठ, हाथ और कंधे की हड्डियां टूट गईं, टखने में मोच आ गई और सिर और चेहरे पर चोटें आईं।

उन्होंने कहा, "जैसे ही अंधेरा छटा, मैंने आसपास के वातावरण का जायजा लिया और भागने की योजना बनाने लगा। मैंने खुद को दोनों ओर चट्टानों से घिरी एक घाटी में पाया। टूटी हड्डियों के बावजूद मैं पैदल चलकर 7,000 फुट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गया।"

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संपर्क

पहली ही रात पायलट ने घर पर साधा संपर्क

पायलट ने बताया कि उसने जाग्रोस पर्वतमाला की एक दरार में खुद को छिपा लिया। ईरान में अपनी पहली रात को ही वो परिजनों से संपर्क साधने में कामयाब रहा।

उन्होंने कहा, "जब मैंने पहाड़ी की चोटी पर अपने बचावकर्ताओं को देखा, तो वह क्षण मेरे जीवन के सबसे महान क्षणों में से एक था। यह टीम वर्क, प्रशिक्षण, आस्था, निर्णयों और नेतृत्व की कहानी है, जिसने कुछ ऐसा किया जो इतिहास में एक उदाहरण के रूप में दर्ज होगा।"

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