अमेरिका ने मध्य-पूर्व में 2003 के बाद सबसे बड़ी सेना तैनात की, दर्जनों लड़ाकू विमान-युद्धपोत पहुंचे
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। CNN के मुताबिक, अमेरिका इस हफ्ते ईरान पर हमला कर सकता है। केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलना बाकी है। वहीं, द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि मध्य-पूर्व में अमेरिका लगातार अपने सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है। 2003 में इराक पर हमले के बाद अमेरिका ने मध्य-पूर्व में सबसे बड़ी फौज इकट्ठा कर ली है। इनमें कई आधुनिक विमान भी शामिल हैं।
विमान
अमेरिका ने मध्य-पूर्व में भेजे F-35 और F-22 विमान
फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि अमेरिकी वायुसेना के दर्जनों लड़ाकू विमान जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पहुंच गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें F-35, F-15, F-16, F-22 रैप्टर स्टील्थ लड़ाकू विमान, E-3 एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, और E-11 बैटलफील्ड एयरबोर्न कम्युनिकेशंस नोड विमान शामिल हैं। बीते दिन मध्य-पूर्व में कई अमेरिकी KC-135 विमान और E3 सेंट्री एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट उड़ते देखे गए।
नौसेना
नौसेना ने भी 13 जहाज तैनात किए
अमेरिकी नौसेना ने भी मध्य-पूर्व और पूर्वी मेडिटेरेनियन सागर में किसी संभावित ऑपरेशन की मदद के लिए 13 जहाज तैनात किए हैं। इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव करने में सक्षम 9 डिस्ट्रॉयर शामिल हैं। वहीं, दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप के 4 डिस्ट्रॉयर भी मध्य-पूर्व पहुंच रहे हैं। ओपन-सोर्स ट्रैकिंग के मुताबिक, 150 से ज्यादा कार्गो विमान हथियार और गोला-बारूद लेकर क्षेत्र में आए हैं।
फैसला
सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चित हैं ट्रंप
CNN के मुताबिक, सेना ने व्हाइट हाउस को बताया कि वो इस हफ्ते के अंत तक हमले के लिए तैयार है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी अनिश्चित हैं। रिपोर्ट में दावा है कि ट्रंप ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह ईरान पर हमला करना चाहते हैं या नहीं। अगर हमला किया, तो इसका उद्देश्य क्या होगा? क्या हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने, उसकी मिसाइल प्रणाली को खत्म करने या सरकार गिराने के लिए होगा?
अभियान
कई हफ्ते चल सकता है अभियान- रिपोर्ट
अमेरिकी समाचार एजेंसी एक्सियोस के मुताबिक, अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है तो यह कई हफ्तों तक चलने वाला अभियान होगा। WSJ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की योजना में ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेताओं को मारने का अभियान शामिल है, जिसका मकसद सरकार को उखाड़ फेंकना है। इसके अलावा हवाई हमला भी होगा, जो परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाएगा। ये दोनों अभियान शायद कुछ हफ्तों तक चले।
कूटनीति
सैन्य उपायों के बीच कूटनीति भी जारी
वहीं, दोनों देशों में कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। इसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, "बातचीत के कुछ हिस्से सकारात्मक रहे, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बनी है।" वहीं, अराघची ने कहा, "'गाइडिंग प्रिंसिपल्स' पर आम सहमति बन गई है और इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर हम एक मसौदा लिखना शुरू करेंगे।"