यूक्रेन में जवाबी हमला करेंगे यूरोपीय शांति सैनिक, 11 देशों का सैन्य अभ्यास शुरू
यूक्रेन में जब युद्धविराम के बाद शांति सेना के तौर पर ब्रिटिश और यूरोपीय सैनिक तैनात होंगे, तो रूसी हमले की सूरत में उन्हें जवाबी कार्रवाई करने की छूट मिलेगी। यह पहल एक नए एंग्लो-फ्रांसीसी मिशन का हिस्सा है, जिसका मकसद स्टारलिंक जैसी अमेरिकी तकनीक पर निर्भर हुए बिना काम करना है। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य शांति सैनिकों को सुरक्षित रखना है। साथ ही यह दिखाना भी है कि यूरोप के देश मिलकर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
अंतरराष्ट्रीय कोआलिज्जा अभ्यास: तेजी से तैनाती और सहयोग की तैयारी
इसी महीने के आखिर में फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, पोलैंड और स्वीडन समेत 11 देशों के करीब 2,800 सैनिक पोलैंड में 'एक्सरसाइज़ कोआलिज्जा' में शामिल होंगे। इस अभ्यास में युद्धविराम होने के बाद यूक्रेन में सैनिकों को तेजी से कैसे तैनात किया जाए, इसकी तैयारी होगी। इसके अलावा यह भी परखा जाएगा कि अमेरिकी मदद के बिना भी ये सेनाएं कितनी बेहतर तरीके से मिलकर काम कर पाती हैं। इस पूरे अभ्यास का मकसद सेना की तैयारियों को और मजबूत करना है, ताकि यूक्रेन को अपने पड़ोसी देशों से एक मजबूत और भरोसेमंद सहारा मिल सके।