यूक्रेन में अनाज निर्यात का संकट, काला सागर से निर्बाध आवाजाही के लिए भारत-तुर्की और मिस्र से गुहार
यूक्रेन ने अनाज निर्यात के लिए काला सागर में सामान्य जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने के लिए तुर्की, मिस्र और भारत के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
यूक्रेन का कहना है कि इस कदम से इन देशों के जहाज यूक्रेन और रूसी बंदरगाहों के बीच सुरक्षित रूप से आ-जा सकेंगे।
दरअसल, पिछले साल अगस्त से रूसी हवाई हमलों ने यूक्रेन के बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है और जहाजों की आवाजाही बाधित कर दी है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की का कहना है कि उनका देश रेल के जरिए इतनी बड़ी मात्रा में माल की ढुलाई नहीं कर सकता है।
यूक्रेन ने यूरोपीय संघ से 'सॉलिडेरिटी लेन' की मांग की
यूक्रेन के खाद्य निर्यात के लिए देश के काला सागर बंदरगाह मुख्य मार्ग हैं, जहां से हर साल 4 करोड़ टन तक अनाज भेजने की क्षमता है, लेकिन फिलहाल निर्यात सामान्य स्तर का सिर्फ 38 प्रतिशत ही हो रहा है।
खाद्य आपूर्ति जारी रखने और अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए यूक्रेन यूरोपीय संघ से 'सॉलिडेरिटी लेन' को फिर से शुरू करने का भी आग्रह कर रहा है।
इन लेन से यूरोप के रास्ते जमीन के जरिए निर्यात हो पाएगा। इस बारे में बातचीत जारी है, लेकिन रूस अभी तक इस नए कॉरिडोर के विचार पर सहमत नहीं हुआ है।
बता दें कि अगस्त से, बंदरगाह के बुनियादी ढांचे और जहाजों पर रूसी हवाई हमलों के कारण ऐसे शिपमेंट रोक दिए गए थे।