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ईरान के खिलाफ 'समुद्री नाकेबंदी' लगाने पर विचार कर रहे डोनाल्ड ट्रंप- रिपोर्ट
ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी पर विचार कर रहे हैं ट्रंप

ईरान के खिलाफ 'समुद्री नाकेबंदी' लगाने पर विचार कर रहे डोनाल्ड ट्रंप- रिपोर्ट

लेखन आबिद खान
Apr 12, 2026
01:24 pm

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक लेख साझा किया है, जिसमें वार्ता सफल न होने की स्थिति में ईरान के खिलाफ संभावित कदमों की जानकारी दी गई है। इस लेख में सुझाव दिया गया है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता, तो अमेरिका उस पर समुद्री नाकेबंदी लगा सकता है।

रिपोर्ट

रिपोर्ट में भारत और चीन का भी जिक्र

ट्रंप द्वारा साझा किए गए लेख में लिखा है, "अगर ईरान अमेरिकी समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो ट्रंप वादे के मुताबिक तेहरान पर बमबारी करके उसे पाषाण युग में वापस भेज सकते हैं। या फिर वे सफल नाकाबंदी रणनीति को दोहरा सकते हैं, जिससे पहले से ही लड़खड़ाती ईरानी अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया जा सके और चीन और भारत को उनके प्रमुख तेल स्रोतों में से एक से वंचित कर उन पर राजनयिक दबाव बढ़ाया जा सके।"

होर्मुज

रिपोर्ट में दावा- अमेरिका के लिए होर्मुज पर कब्जा आसान होगा

लेख में लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट के हवाले से कहा गया है, "अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर पूर्ण नियंत्रण रखना आसान होगा। अगर ईरान अड़ियल रवैया अपनाता है, तो अमेरिकी नौसेना व्यापक निगरानी प्रणाली स्थापित कर सकती है और होर्मुज से आने-जाने वाली चीजों पर नजर रख सकती है। अगर आप खार्ग द्वीप या ओमान के पास संकरे हिस्से से आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको अमेरिका से अनुमति लेनी होगी।"

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वेनेजुएला

वेनेजुएला के खिलाफ इस तरह की रणनीति अपना चुके हैं ट्रंप

ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने से पहले भी इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। इसके तहत, वेनेजुएला से आने-जाने वाले जहाजों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। यहां तक कि शैडो जहाजों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। अमेरिका ने वेनेजुएला से कच्चा तेल ला रहे एक विवादित जहाज का पीछा भी किया था। इन प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल आधारित अर्थव्यवस्था लगभग बर्बाद हो गई थी।

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वार्ता

बिना किसी समझौते के खत्म हो गई ईरान-अमेरिका वार्ता

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे तक वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। वहीं, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका युद्ध में जो कुछ भी हासिल नहीं कर सका, वो सब वार्ता में मांग रहा था।

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