ऊर्जा संकट से जूझ रहे 30-40 देशों के लिए विश्व बैंक ने खोला 5.80 लाख करोड़ रुपये का खजाना
मध्य-पूर्व में चल रहे संकट की वजह से कई देशों में ऊर्जा की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। ऐसे 30 से 40 देशों की मदद के लिए विश्व बैंक तैयारी कर रहा है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा का कहना है कि एक तरफ जहां AI और तेल सप्लाई में किए गए बदलावों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है, वहीं दूसरी तरफ डीजल और उर्वरक (खाद) की बढ़ती कीमतें विकासशील देशों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। इन चुनौतियों का जिक्र इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की सालाना बैठकों से पहले किया गया।
विश्व बैंक ने 5.80 लाख करोड़ रुपये अलग रखे
विश्व बैंक ने देशों को बढ़ती लागत से निपटने में मदद करने के लिए 60 अरब डॉलर (5.80 लाख करोड़ रुपये) अलग रखे हैं। आपातकालीन नकद सहायता मांगने के बजाय कई देश अपने मौजूदा प्रोजेक्ट्स में ही कुछ बदलाव चाहते हैं। जैसे-जैसे पश्चिमी देशों से मिलने वाली सहायता कम हो रही है, मध्य-आय वाले देशों में निजी निवेश भी बढ़ रहा है। बैंक ज्यादा कर्ज के लिए नए और खास तरीकों पर भी काम कर रहा है, जैसे कर्ज को विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बदलना। इसके अलावा, कर्ज से जुड़ी कई और नई योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं।