यूरोप के आसमान में अमेरिकी सेना कैमरे और रडार वाले गुब्बारे तैनात करेगी, निगरानी होगी मजबूत
अमेरिकी सेना यूरोप में सैकड़ों ऊंचे गुब्बारे तैनात करने पर विचार कर रही है।
यह गुब्बारे न केवल लड़ाई में दुश्मन की हरकतों पर नजर रखेंगे बल्कि संचार बनाए रखने, वायु रक्षा को धोखा देने और ड्रोन लॉन्च करने के लिए काम आएंगे।
अमेरिका सैकड़ों हाई-एल्टीट्यूड बैलून तैनात करेगी, जो स्ट्रैटोस्फियर की बढ़ती मिलिट्री अहमियत को दिखाता है। ये गुब्बारे कैमरे और रडार लेकर चल सकेंगे, जिससे टकराव की स्थिति में निगरानी को मजबूत किया जा सके।
ये गुब्बारे 60,000 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ेंगे और जरूरत पड़ने पर आसमान में अतिरिक्त निगरानी के लिए ड्रोन भी छोड़ सकेंगे या इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में काम आ सकेंगे।
एक बार में तैनात होंगे 200 गुब्बारे
अमेरिकी सेना एक बार में 200 से 300 गुब्बारे तैनात करने की योजना बना रही है, जिसमें किसी बड़ी लड़ाई के दौरान सैकड़ों या शायद हज़ारों बैलून दुश्मन के इलाके की तरफ भेजे जा सकते हैं।
जासूसी के अलावा, ये गुब्बारे तब इमरजेंसी कम्युनिकेशन लिंक का काम भी करेंगे, जब सैटेलाइट किसी वजह से काम करना बंद कर दें। इससे पता चलता है कि आधुनिक रक्षा में स्ट्रैटोस्फियर कितना अहम हो गया है।
इसी बीच, भारत भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है और अपनी सीमाओं की निगरानी के लिए खुद के एयरशिप बना रहा है। यह इस बात का सबूत है कि स्ट्रैटोस्फेरिक तकनीक अब पूरी दुनिया में रक्षा के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।