ऑस्ट्रेलिया में नाबालिगों के सोशल मीडिया प्रतिबंध का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
ऑस्ट्रेलिया की सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रही है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को टिकटॉक, स्नैपचैट और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया ऐप्स इस्तेमाल करने से रोका जाना चाहिए या नहीं।
यह कानून पिछले साल लागू हुआ था, जिसे युवाओं को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के मकसद से बनाया गया था। लेकिन कुछ संगठनों ने इसे चुनौती दी है।
उनका कहना है कि इससे लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी और निजता सीमित हो रही है। इसी बीच रेडिट ने भी इस मामले में अपनी बात रखी है। उनका तर्क है कि इस पाबंदी में सभी प्लेटफॉर्म्स को एक ही नजर से देखा गया है, जबकि असल में वे सब अलग-अलग काम करते हैं और उनकी प्रकृति भी एक-दूसरे से काफी अलग है।
सोशल मीडिया बैन पर बहस जारी
कुछ लोग इस कानून को सरकार की दखलंदाजी मानते हैं। इस कानून के विरोध में पहले याचिका दायर करने वाले नोआ जोन्स ने कहा कि यह कदम सेंसरशिप की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उनकी मां का मानना है कि बच्चों को सीधे बैन करने से बेहतर होगा कि उन्हें ऑनलाइन सुरक्षित रहने के तरीके सिखाए जाएं। दूसरी ओर, संचार मंत्री अनिका वेल्स इस कानून का बचाव कर रही हैं।
उनका कहना है कि यह नियम बच्चों को ऑनलाइन होने वाले खतरों और नुकसान से बचाने के लिए लाया गया है। बैन लगने के बाद भी, शोध के नतीजे बताते हैं कि 16 साल से कम उम्र के कई बच्चे सोशल मीडिया तक पहुंचने के नए-नए रास्ते ढूंढ रहे हैं।