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कश्मीर मुद्दे पर तालिबान का बड़ा बयान, कहा- हमें मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का अधिकार
तालिबान ने कही कश्मीर के मुसलमानों लिए आवाज उठाने का अधिकार होने की बात।

कश्मीर मुद्दे पर तालिबान का बड़ा बयान, कहा- हमें मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का अधिकार

Sep 03, 2021
03:00 pm

क्या है खबर?

अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने नई सरकार के गठन की सभी तैयारी पूरी कर ली है और वह शुक्रवार को इसकी घोषणा कर कर सकता है। इससे पहले तालिबान नेतृत्व ने भारत और पाकिस्तान से सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने की भी बात कही थी। इसी बीच अब तालिबान समूह के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कश्मीर को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें कश्मीर सहित पूरी दुनिया में मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है।

बयान

मुसलमान होने के नाते आवाज उठाने का है अधिकार- शाहीन

इंडिया टुडे के अनुसार, BBC उर्दू से बात करते हुए प्रवक्ता शाहीन ने कहा, "मुसलमान होने के नाते हमें कश्मीर, भारत और किसी भी अन्य देश में मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है।" उन्होंने आगे कहा, "हम अपनी आवाज उठाएंगे और कहेंगे कि मुसलमान आपके अपने लोग हैं, आपके अपने नागरिक हैं और वो आपके कानूनों के तहत समान अधिकारों के हकदार हैं।" उनका यह बयान अब भारत के लिए चिंता का सबब बन सकता है।

हथियार

किसी भी देश के खिलाफ हथियार नहीं उठाएगा तालिबान- शाहीन

प्रवक्ता शाहीन ने कहा, "उन्हें मुसलमानों के अधिकारों के लिए बोलने का हक है, लेकिन वह इस मसले में किसी भी देश के खिलाफ हथियान नहीं उठाएंगे। तालिबान की किसी देश के खिलाफ हथियार उठाने की कोई नीति नहीं है।" हक्कानी नेटवर्क को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा कोई समूह नहीं है और वह अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात का हिस्सा हैं। सरकार में उनसे पूरे सहयोग की उम्मीद है।

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हक्कानी नेटवर्क

अनस हक्कानी ने दिया था कश्मीर मुद्दे में दखल नहीं देने का बयान

इससे पहले हक्कानी नेटवर्क के शीर्ष नेता अनस हक्कानी ने बुधवार को साफ किया था कि हक्कानी नेटवर्क का कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा था, "कश्मीर उनके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और इस तरह का कोई भी हस्तक्षेप पूरी तरह से उनकी नीति के खिलाफ होगा। हम अपनी नीति के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? यह स्पष्ट है कि हम कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं करेंगे।"

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वार्ता

भारत ने मंगलवार को तालिबान के साथ पहली राजनयिक वार्ता

भारत ने मंगलवार को दोहा में तालिबान के साथ अपना पहला राजनयिक संपर्क स्थापित किया था। यह बैठक कतर में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल और तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई के बीच हुई थी। भारत ने कथित तौर पर आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान के क्षेत्र के उपयोग पर चिंता जताई थी। इस पर स्तानिकजई ने भारत को आश्वासन दिया कि इन मुद्दों को सकारात्मक रूप से हल किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय की ओर से भी स्पष्ट की गई थी स्थिति

गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि अफगानिस्तान में भारत का तत्काल ध्यान यह सुनिश्चित करना है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाए। तालिबान को मान्यता देने के बारे में बात करना अभी "बहुत जल्दबाजी" होगी। उन्होंने कहा था कि फिलहाल हमारा ध्यान तालिबान से बातचीत पर न होकर वहां आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिलने देने पर है।

चिंता

क्या है भारत की प्रमुख चिंता?

बता दें कि वर्तमान में भारत इस बात से चिंतित है कि सुन्नी और वहाबी आतंकवादी समूह तालिबान को अपनी पनाहगाह में बदल देंगे। इसके बाद अफगानिस्तान इस्लामी आतंकवाद का केंद्र बन सकता है। वहीं माना जा रहा है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ी कर सकता है। अधिकारियों ने पिछले महीने कहा था कि कश्मीर में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी, लेकिन स्थिति अभी नियंत्रण में हैं।

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