इजरायल में चुनाव से पहले भड़काऊ बयानों में तेजी, अब तक 227 बयान दर्ज
इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से पहले एक नई रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों की ओर से दिए गए भड़काऊ बयानों में तेज बढ़ोतरी बताई गई है।
इस साल अब तक कुल 227 ऐसे बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें से ज्यादातर बयान गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों को निशाना बनाते हुए दिए गए हैं।
कुछ बयान तो इतने उग्र थे कि उन्होंने इजरायल के अरब नागरिकों को भी नहीं बख्शा। बयानबाजी में यह तेजी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदा धुर-दक्षिणपंथी सरकार के दौरान देखने को मिली है, जिससे देश में लोगों के बीच दूरियां बढ़ने की चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
बेंजामिन नेतन्याहू का नारा बढ़ा रहा ध्रुवीकरण की चिंता
नेतन्याहू ने नारा दिया है, 'राइट या फिलिस्तीन।' इस नारे को लेकर उनकी काफी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि यह नारा देश में ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, नेतन्याहू ने खुद सबसे कड़ी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है।
इससे पहले रक्षा मंत्री ने कहा था कि 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद, सेना गाजा में 'इंसानी जानवरों' से लड़ रही है। बाद में इन्हीं शब्दों को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नरसंहार के एक मामले में सबूत के तौर पर पेश किया गया था।
इसी बीच, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और AI टूल्स के जरिए नफरत फैलाने वाले भाषण तेजी से फैल रहे हैं।
वेस्ट बैंक में हिंसा बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके लिए बहुत कम गिरफ्तारियां हुई हैं। चुनाव का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, माहौल और भी तनावपूर्ण होता जा रहा है।