ओमान में फंसी भारतीय महिलाओं का दर्द, राजदूत ने दिया न्याय और मदद का भरोसा
ओमान में भारत के राजदूत प्रशांत पीसे ने हाल ही में दूतावास के एक आश्रय स्थल में भारतीय महिला घरेलू कामगारों से मुलाकात की। राजदूत उन महिलाओं से मिले जो अपने मालिकों से भागकर आई थीं या जिन्हें छोड़ दिया गया था और उन्होंने उन्हें मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कामगारों को आश्वासन दिया कि उनकी बकाया वेतन और दुर्व्यवहार जैसी शिकायतों को दूतावास की सामुदायिक मामलों की टीम जल्द से जल्द सुलझाएगी।
कल्याण समझौतों से बाहर रखे गए घरेलू कामगार
यह कदम खाड़ी देशों में भारतीय घरेलू कामगारों के शोषण की उन परेशान करने वाली रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जो लगातार सामने आ रही हैं। हैदराबाद की शबनम बेगम नाम की एक कामगार ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें धोखे से ओमान में काम पर बुलाया गया था और दूतावास में शरण मिलने से पहले उन्हें बेहद मुश्किल परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। भले ही भारत के खाड़ी देशों के साथ कल्याण के समझौते हैं, लेकिन ज्यादातर घरेलू कामगार इन समझौतों के दायरे में नहीं आते। ऐसे में, दूतावास की मदद उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बन जाती है।