PoK में हजारों लोगों ने निकाली रैली, बोले- हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं
क्या है खबर?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान के दमन के खिलाफ आवाजें तेज हो गई हैं। आज हजारों प्रदर्शनकारियों ने रावलकोट में इकट्ठा होकर 'PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है' जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वो इस क्षेत्र में जरूरी खाद्य सामग्री की आपूर्ति को बाधित करना जारी रखेगी, तो वे 'दूसरे रास्ते' अपनाएंगे। इसे पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।
प्रदर्शन
रावलकोट के ईदगाह मैदान में जुटे हजारों लोग
दरअसल, रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा बलों पर दशकों से राजनीतिक उपेक्षा, आर्थिक शोषण और प्रशासनिक दमन का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए खाने-पीने के सामान की आपूर्ति पर नाकाबंदी लगा दी है। PoK के नेता सरदार अम्मान खान ने कहा, "हमें आपके राशन की जरूरत नहीं है। आपको हमारी जरूरत है।"
बयान
खान बोले- भारत की ओर रुख सकते हैं लोग
अम्मान खान ने आगे कहा, "पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। पाकिस्तान को इस क्षेत्र की जरूरत पाकिस्तान पर निर्भरता से कहीं ज्यादा है।" एक अन्य प्रदर्शन के दौरान अम्मान ने कहा, "अगर भोजन और अन्य जरूरी वस्तुओं पर प्रतिबंध जारी रहे, तो क्षेत्र के लोग सहायता के लिए भारत की ओर रुख कर सकते हैं।" खान ने कहा कि ऐसा करने से क्षेत्र की राजनीतिक गतिशीलता बदल जाएगी और इस्लामाबाद पर दबाव पड़ेगा।
असीम मुनीर
प्रदर्शनकारियों ने असीम मुनीर को तानाशाह बताया
प्रदर्शन से जुड़े एक अन्य वीडियो में लोगों ने कहा कि यह क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। निवासियों ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को लेकर कहा कि वे तानाशाह को बर्दाश्त नहीं करेंगे। ये विरोध प्रदर्शन केवल PoK तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेशों में रहने वाले समर्थकों ने कई देशों में पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों के बाहर प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनके उद्देश्य प्राप्त नहीं हो जाते।
विरोध
करीब एक महीने से जारी है प्रदर्शन
PoK में करीब एक महीने से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई में स्थानीय लोग जुलाई में होने वाले चुनावों के लिए शरणार्थियों को दी गई 12 आरक्षित सीटों का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनों को रोकने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने लोगों तक खाने-पीने की आपूर्ति रोक दी है, इंटरनेट सेवाएं और रास्ते बंद कर दिए हैं। वहीं, झड़पों के दौरान कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई है।
पिछली हिंसा
पिछले साल भी हुए थे प्रदर्शन
पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में भी PoK में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए थे। इस प्रदर्शन का नेतृत्व भी JAAC कर रही थी। तब लोग महंगाई, बेरोजगारी और पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। तब धीरकोट, मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली, रावलकोट, केरन और नीलम घाटी में हिंसा फैली थी। प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोकने के लिए रखे कंटेनरों को नदी में फेंक दिया था।